देश में हर साल लोगों को लेनी पड़ सकती है वैक्सीन, जानें क्यों?

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मुंबई: भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना महामारी जारी है। इसबीच देश के विशेषत्रों का मानना है कि कुछ समय बाद कोविड-19 बीमारी इंफ्लुएंजा यानि फ्लू की तरह हो जाएगी।

साथ ही इससे बचने के लिए हर साल कोरोना वैक्सीन लेने की जरूरत पड़ सकती है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च में डिवीजन ऑफ ऐपिडेमियोलॉजी और कम्युनिकेबल डिसीज के प्रमुख समीरन पांडा ने कहा है कि कुछ समय के बाद कोरोना एंडेमिक स्टेज पर पहुंच जाएगा।

इसका मतलब हुआ कि यह हमेशा एक निश्चित आबादी या क्षेत्र में मौजूद रहेगा लेकिन ये सामान्य बुखार जैसा हो जाएगा।

उन्होंने कहा है कि वायरस का रूप बदलना (म्यूटेशन) एक सामान्य बात है और इसमें घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

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सेंटर्स फॉर डिसीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (सीडीसी) के मुताबिक, किसी भौगोलिक क्षेत्र के भीतर एक आबादी में किसी बीमारी या संक्रामक वायरस की मौजूदगी या प्रसार को एंडेमिक कहते हैं।

जब ये कभी वायुमंडल से कभी खत्म ना हो लेकिन ये सामान्य स्थिति में मौजूद रहे।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के विशेषज्ञ समीरन पांडा ने कहा कि इन्फ्लुएंजा, जिसे आमतौर पर फ्लू के रूप में जाना जाता है, 100 साल पहले एक महामारी थी, लेकिन आज यह सामान्य बीमारी है।

इसी तरह कोरोना के मामले में हम उम्मीद करते हैं कि यह महामारी होने की अपनी वर्तमान स्थिति से धीरे-धीरे एंडेमिक हो जाएगा।

हम फिलहाल सिर्फ बुजुर्गों को हर साल कोरोना वैक्सीन लेने की सलाह देते हैं।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कोरोना वायरस म्यूटेशन करता जाता है हम वैक्सीन में मामूली बदलाव करते रहते हैं। इसलिए, घबराने की जरूरत नहीं है।

पांडा ने बताया कि कोरोना के खिलाफ वैक्सीन संक्रमण से नहीं बचाती, लेकिन बीमारी को गंभीर नहीं होने देती।

उन्होंने कहा कि प्रयोगों में यह साबित हुआ है कि फिलहाल भारत में मौजूद टीके नए कोरोना वेरिएंट के खिलाफ भी प्रभावी हैं।

हालांकि, अलग-अलग वैरिएंट पर इनका अलग-अलग असर दिख सकता है।

इस दौरान उन्होंने शिशुओं को स्तनपान कराने वाली माताओं को वैक्सीन लेने की सलाह दी है।

पांडा ने कहा कि वैक्सीन के बाद मां में विकसित हुईं एंटीबॉडीज स्तनपान के दौरान बच्चे तक पहुंचती हैं। साथ ही ये बच्चे के लिए काफी मददगार हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि टीके सभी के लिए बिल्कुल सुरक्षित हैं, जिनमें अस्थमा, धूल एलर्जी, परागकणों की एलर्जी जैसी सामान्य एलर्जी वाले लोग शामिल हैं।

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