Moderna ने माना उसके वैक्सीन की ‘सुरक्षा’ हो रही कमजोर, बूस्टर डोज की सिफारिश

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नई दिल्ली: वैश्विक महामारी कोरोना के जानलेवा वायरस से मुक्ति के लिए एकमात्र विकल्प वैक्सीनेसन ही है। लेकिन अब वक्त के साथ इसकी धार ही कम होने की बात सामने आने लगी है।

कोरोना की वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा कितने वक्त तक रहती है, इसको लेकर बहस जारी है।

इस बीच मॉडर्ना कंपनी ने भी माना है कि उनकी कोविड वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है। ऐसे में उन्होंने बूस्टर डोज की वकालत की है।

खबर के मुताबिक, मॉडर्ना ने यह बात ताजा अध्ययन के आधार पर कही है।

मॉडर्ना ने अध्यक्ष स्टीफन होज ने कहा कि यह सिर्फ एक अनुमान है। लेकिन आशंका है कि सुरक्षा कम होने की वजह से 600,000 कोविड केस अधिक देखने पड़ सकते हैं। यह आंकड़ा सिर्फ अमेरिका को आधार बनाकर दिया गया है।

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होज ने यह नहीं बताया कि इसमें गंभीर केस कितने होंगे, लेकिन यह दावा किया कि हॉस्पिटल में मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।

यह डेटा उन पहले की स्टडीज से बिल्कुल विपरीत हैं जो बताती थीं कि मॉडर्ना की वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन से ज्यादा वक्त तक रहती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अंतर इसलिए है क्योंकि मॉडर्ना टीके में मेसेंजर आरएनए (एमआरएनए) की मात्रा ज्यादा होती है।

वहीं पहली और दूसरी खुराक के बीच का अंतर भी ज्यादा है।

जो विश्लेषण सामने रखा गया, उसमें पाया गया कि जिन लोगों ने 13 महीने पहले कोविड टीका लगवाया था, उनमें इंफेक्शन रेट उन लोगों के मुकाबले ज्यादा था जिन्होंने 8 महीने पहले कोरोना टीका लगवाया था।

इस डेटा का स्टडी पीरियड जुलाई से अगस्त के बीच था, जिस वक्त डेल्टा वेरिएंट प्रमुख रूप से हावी था।

बता दें कि मॉडर्ना ने एक सितम्बर को अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन को पत्र लिखकर बूस्टर डोज की इजाजत मांगी है।

होज का कहना है कि स्टडी दिखाती है कि इससे कोविड-19 केस कम हो सकते है।

उन्होंने कहा, ‘हमें लगता है कि एमआरएनए-1273 की तीसरी खुराक से इम्यूनिटी बढ़ने के चांस हैं, जिससे अगले साल तक कोरोना को खत्म करने के हमारे लक्ष्य में मदद मिल सकती है।’

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