बी.1.617.2 पर भारतीय वैज्ञानिकों के अनुभव का लाभ ले रही दुनिया

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नई दिल्ली: जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए कोरोना वायरस के जिस वैरिएंट बी.1.617.2 की पहचान सबसे पहले महाराष्ट्र में हुई थी।

अब उसी वैरिएंट में तीन और नए बदलाव देखने को मिले हैं,  जिन्होंने भारत की तरह दूसरे देशों में भी संकट खड़ा कर दिया है।

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के वैरिएंट बी.1.617.2 की पहचान होने के बाद ब्रिटेन, जापान और नेपाल ने कोरोना के नए वैरिएंट का सामना करने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों से सहयोग लेना शुरू कर दिया है।

भारत में बीते 2 महीने के दौरान सामने आई स्थिति को देखते हुए यहां अस्पताल में बेड, दवाएं इत्यादि पर काम शुरू हो चुका है।

एनआईवी पुणे और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी सहयोग दे रहा है। भारत में महामारी की दूसरी लहर का पीक गुजर चुका है। लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, नेपाल और सिंगापुर में स्थिति खराब हो रही है।

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आईसीएमआर ने बीते 22 अप्रैल को खुलासा किया था कि बी.1.617.2 वैरिएंट ( डबल म्यूटेशन ) के चलते महामारी फैली है और 52 फीसदी लोगों में सांस लेने में कठिनाई जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी इस वैरिएंट  को चिंता का विषय बताया है।

भारत की तरह ब्रिटेन में न सिर्फ मरीज बढ़ रहे हैं बल्कि अस्पतालों में भी इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। वहां के स्वास्थ्य सचिव मैट हैनकॉक ने पुष्टि की है कि पिछले 1 सप्ताह में मरीजों की संख्या तीन से बढ़कर छह हजार हुई है।

इंग्लैंड के उत्तरी पश्चिमी इलाके में स्थानीय प्रसार भी हुआ है। वहीं, नई दिल्ली स्थित आईजीआईबी-सीएसआईआर के वैज्ञानिकों ने जानकारी दी है कि काठमांडो से आए 35 सैंपल में बी1.617.1 और बी1.617.2 वैरिएंट मिला है जो कि भारत की तरह आक्रामक भी है और एंटीबॉडी कम करने की क्षमता भी रखता है।

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