Palamu: पलामू जिले में प्रकृति पर्व सरहुल धूमधाम से मनाया गया। विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें पूजा-अर्चना, नृत्य और शोभायात्राओं ने लोगों को प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।
जीएलए कॉलेज में सरहुल पूजा महोत्सव
नीलांबर-पीताम्बर विश्वविद्यालय और पलामू प्रमंडल आदिवासी छात्र संगठन के संयुक्त तत्वावधान में जीएलए कॉलेज के जेएन दीक्षित छात्रावास अखाड़ा में सरहुल पूजा महोत्सव आयोजित हुआ। पाहन इंद्रजीत उरांव ने सखुआ डाली को विधि-विधान से स्थापित कर तर्पण अर्पित किया। ज्योति हॉस्टल की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। संयोजक डॉ. संजय बाड़ा ने स्वागत भाषण दिया।
सरहुल नृत्य प्रतियोगिता में आदिवासी बालिका छात्रावास प्रथम, ज्योति हॉस्टल द्वितीय और रेड़मा हॉस्टल व जेएन दीक्षित छात्रावास तृतीय रहे। मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने सरहुल गीत प्रस्तुत किए।
विशिष्ट अतिथि डॉ. कैलाश उरांव ने प्रकृति संरक्षण पर जोर दिया। ज्ञानचंद पांडेय ने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण की बात कही, जबकि मुख्य अतिथि डॉ. केसी झा ने कहा कि सरहुल हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की रक्षा की प्रेरणा देता है।
सतबरवा में शोभायात्रा और पूजा
अद्दि कुडूख सरना समाज सतबरवा के नेतृत्व में टीचर ट्रेनिंग कॉलेज परिसर में सरहुल महोत्सव आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि पांकी विधायक कुशवाहा डॉ. शशिभूषण मेहता सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए। पाहनों और विधायक ने विधि-विधान से प्रकृति की पूजा की। इसके बाद मांदर की थाप पर नृत्य-गीत के साथ शोभायात्रा निकाली गई, जो रांची रोड से मेलाटांड़, कांति चौक, पुराना बस स्टैंड, रामघाट, महावीर चौक और पुरानी मस्जिद होते हुए वापस कार्यक्रम स्थल पर समाप्त हुई।
विधायक डॉ. मेहता ने कहा कि सरहुल प्रकृति से जुड़ा त्योहार है और सरना समाज आदिकाल से इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण करता आ रहा है। उन्होंने हर व्यक्ति से प्रतिवर्ष पौधा लगाने की प्रतिज्ञा लेने का आह्वान किया। जिला परिषद सदस्य सुधा कुमारी ने कहा कि पौधारोपण से ही पर्यावरण और मानव जीवन सुरक्षित रह सकता है।
प्रकृति संरक्षण का संदेश
सरहुल के आयोजनों में जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संदेश प्रमुख रहा। पूरे जिले में उत्साह के साथ इस पर्व ने लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी याद दिलाई।