बाइक-स्कूटी वाले ऐसा बिल्कुल न करें, वरना पेट्रोल तो जेब से पैसे उड़ा ही रहा है, खुद पेट्रोल भी उड़ जायेगा

News Aroma Media
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नयी दिल्ली : भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं।

ऐसे में गाड़ियों के माइलेज का असर गाड़ी चलानेवाले की जेब पर पड़ रहा है। इसलिए जरूरी है कि गाड़ी का माइलेज आपका साथ दे।

आइये जानते हैं कि बाइक और स्कूटी चलानेवाले कैसे ईंधन की बचत कर सकते हैं :

कोशिश करें कि आप स्थिर गति से गाड़ी चलायें। गाड़ी में सही टायर प्रेशर रहना चाहिए।

यानी उसमें उचित हवा रहनी चाहिए। ड्राइव चेन टेंशन को भी सही ढंग से एडजस्ट करें और अपनी गाड़ी की अधिकृत वर्कशॉप या फिर किसी बढ़िया मेकेनिक से अपनी गाड़ी के इंजन को नियमित रूप से ट्यून करवायें और गाड़ी की सर्विस करवायें।

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बाइक-स्कूटी वाले ऐसा बिल्कुल न करें, वरना पेट्रोल तो जेब से पैसे उड़ा ही रहा है, खुद पेट्रोल भी उड़ जायेगा

ऐसा तो करें ही मत

गाड़ी चलाते समय क्लच लीवर को दबाकर नहीं रखें। इंजन को लो गियर में ज्यादा देर तक नहीं चलायें।

अपनी मोटरसाइकिल को सीधी धूप में पार्क न करें, क्योंकि इससे पेट्रोल का वाष्पीकरण होता है। साथ ही, सवारी करते समय ब्रेक पेडल को दबाये नयीं रखें।

ट्रैफिक रुकने के दौरान इंजन आरपीएम को न बढ़ायें, अगर 30 सेकंड से अधिक का पड़ाव है, तो इंजन को बंद करें। एयर फिल्टर असेंबली के इनलेट को ढंके नहीं।

इंजन को आगे और साइड में कवर न करें। यह एयर कूलिंग के लिए जरूरी इंजन फिन्स तक सुचारू एयर फ्लो को रोक सकता है और इंजन उच्च तापमान पर चल सकता है।

इंजन ऑयल कुशल मोटरसाइकिल प्रदर्शन और बढ़े हुए इंजन जीवन के लिए जरूरी फैक्टर है। इसे चेक करने के लिए गाड़ी को मेन स्टैंड पर खड़ी करें।

अपनी मोटरसाइकिल को सीधी धूप में पार्क न करें

इसके बाद डिपस्टिक का उपयोग करके इंजन ऑयल के स्तर की जांच करें। डिपस्टिक के ऊपरी और निचले स्तर के निशान के बीच इंजन ऑयल का स्तर बनाये रखा जाना चाहिए।

अगर जरूरी हो, तो डिपस्टिक पर इंजन ऑयल को ऊपरी स्तर तक ऊपर करें। अगर इंजन ऑयल बदला जाना है, तब उसे चेंज कर दें।

इतना ही नहीं, बाइक की बैट्री की लाइफ लंबे समय के लिए बढ़ाने और परेशानी से बचने के लिए समय-समय पर उसके मेंटेनेंस की जरूरत होती है।

विश्वसनीय बैट्री परफॉर्मेंस के लिए नियमित अंतराल पर इसकी जांच करें। बैट्री शेल पर ऊपर और नीचे के चिह्नों के विरुद्ध इलेक्ट्रोलाइट स्तर की जांच जरूर कर लेनी चाहिए।

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