नई दिल्ली: केन्द्र सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय और केन्द्रीय जांच ब्यूरो के प्रमुखों के कार्यकाल को बढ़ाने वाले दो विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पेश किए। विपक्ष ने इन विधेयकों का विरोध किया और कहा कि यह अलोकतांत्रिक और गलत उद्देश्य से लाए गए हैं।
केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने दोनों विधेयकों को लोकसभा में पेश किया। उन्होंने कहा कि विधेयक का उद्देश्य कार्यपद्धति को व्यवस्थित करना है और इन पदों पर नियुक्ति को पांच साल के लिए फिक्स करना है।
यह विधेयक हैं केन्द्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) विधेयक 2021 और विशेष दिल्ली पुलिस स्थापना (संशोधन) विधेयक 2021 हैं।
विधेयक को पेश किए जाने का विरोध कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, शशि थरूर, के सुरेश, गौरव गोगोई, तृणमूल के सौगत राय, आरएसपी नेता एनके प्रेमचंद्रन ने किया।
लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि विधेयक भ्रामक, मनमाना और दुर्भवनापूर्ण है। इससे सरकार को अपने इशारों पर नाचने वाले अधिकारियों को पदों पर बिठाना है।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि इससे निष्पक्ष जांच के बुनियादी सिद्धांत को ठेस पहुंचेगी। सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि इन अधिकारियों का कार्यकाल केवल अप्रत्याशित मामलों में ही किया जाना चाहिए।
सभी नेताओं ने इनपर अपना-अपना पक्ष रखा। सौगत राय ने कहा कि केन्द्र सरकार प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को परेशान करने के लिए कर हैं।
आरएसपी नेता एनके प्रेमचन्द्रन ने कहा कि विधेयक सरकार के पक्ष में काम करने वाले अधिकारियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए लाए हैं।
विपक्ष के प्रश्नों के उत्तर में मंत्री ने कहा कि वह विधेयक को पारित किए जाने के दौरान इनका उत्तर देंगे।