नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एक वादी को केवल इसलिए नुकसान नहीं होना चाहिए कि उसके वकील की डायरी में गलत डेट दर्ज हो गई है
जस्टिस प्रतिभा सिंह की बेंच ने कहा कि कोर्ट को पड़ताल करनी होगी कि क्या वकील की डायरी में गलत डेट दर्ज होने की दलील एक बहाना है या वास्तविकता।
कोर्ट ने कहा कि आमतौर पर कोर्ट में पेश होने वाले वकील आमतौर पर कोर्ट की डायरी मेंटेन करते हैं। अधिकांश वकीलों की डायरियों में डेट उनके साथ काम करने वाले क्लर्क दर्ज करते हैं।
उस डायरी में केस की सुनवाई की पिछली तारीख भी दर्ज की जाती है। कुछ वकीलों के क्लर्क उस कोर्ट का नाम भी भी दर्ज करते हैं, जहां मामला लिस्टेड है।
कोर्ट ने कहा कि क्लर्क या वकील की ओर से असावधानी की वजह से कारण गलत एंट्री होना बड़ी बात नहीं है।
ऐसी स्थिति में डायरी में गलत तिथि दर्ज होने के कारण अगर वकील कोर्ट में उपस्थित नहीं होता है तो वादी को नुकसान नहीं होना चाहिए।
मामला दिल्ली के श्रम न्यायालय से जुड़ा हुआ है, जिसमें श्रमिक के वकील की डायरी में गलती से 14 दिसंबर, 2016 की जगह 19 दिसंबर, 2016 दर्ज हो गया था।
वकील के पेश नहीं होने की वजह से श्रम न्यायालय ने 14 दिसंबर, 2016 को वाद खारिज कर दिया था।
श्रमिक ने एक सप्ताह के भीतर याचिका खारिज करने के आदेश को रद्द करने की मांग की थी लेकिन श्रम न्यायालय ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि श्रमिक कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था।
श्रम न्यायालय के आदेश के खिलाफ श्रमिक हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने श्रमिक के वकील की डायरी देखी।
वकील की डायरी में 14 दिसंबर, 2016 की बजाय 19 दिसंबर, 2016 में एंट्री हो गई थी। हाईकोर्ट ने पूरी याचिका को देखकर पाया कि श्रमिक काफी गरीब था।
उसके बाद कोर्ट ने श्रम न्यायालय को कानून के मुताबिक श्रमिक की याचिका पर आगे सुनवाई का आदेश दिया।