गिरफ्तारी के दौरान सही प्रक्रिया नहीं अपनाई गई तो आरोपी को करना होगा रिहा

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो, अगर जांच एजेंसी गिरफ्तारी के दौरान सही प्रक्रिया का पालन नहीं करती है तो आरोपी को रिहा किया जाना चाहिए।

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Supreme Court on Arrest Procedure : Supreme Court अपने एक फैसले में कहा कि अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो, अगर जांच एजेंसी गिरफ्तारी के दौरान सही प्रक्रिया का पालन नहीं करती है तो आरोपी को रिहा किया जाना चाहिए।

भूषण स्टील (Bhusan Steel) के मालिक नीरज सिंघल (Neeraj Singhal) को सुप्रीम कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दे दिया है।

सिंघल पर 46 हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के दौरान ED ने सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने नीरज सिंघल की रिहाई की याचिका मंजूर कर ली। कोर्ट ने माना कि सिंघल पर लगे आरोप गंभीर हैं।

इन आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता क्योंकि इनसे अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है और बाजार में अस्थिरता फैलती है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि ED ने सिंघल को गिरफ्तारी का कारण लिखित में नहीं बताया।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, गिरफ्तारी का कारण लिखित में बताना जरूरी है। ED ने ऐसा नहीं किया, इसलिए सिंघल को राहत दी जाती है। कोर्ट ने कहा कि हमें कानून के मुताबिक काम करना होगा।

यहां प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है। इससे बाजार में अस्थिरता आई और खातों में हेरफेर किया गया। यह समाज के साथ धोखाधड़ी है। कोर्ट ने आगे कहा कि ईडी भविष्य में इस गलती को नहीं दोहराएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि नियमों का पालन न करने पर अदालतों को सख्त होना होगा।

सिंघल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वह करीब 16 महीने से हिरासत में हैं और पंकज बंसल मामले में शीर्ष अदालत के फैसले का पालन नहीं किया गया।

हालांकि, पीठ ने इस पर कोई टिप्पणी करने से परहेज किया कि क्या सिंघल को दोबारा गिरफ्तार किया जा सकता है। जस्टिस खन्ना ने कहा कि मुझे नहीं पता कि आप उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर सकते हैं या नहीं। मैं इस बारे में पूरी तरह से निश्चिंत नहीं हूं। मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहूंगा।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि सिंघल को निचली अदालत की ओर से तय की जाने वाली शर्तों पर रिहा किया जाए। इसके अलावा, उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और वह देश से बाहर भी नहीं जा सकते।

सिंघल ने दिल्ली हाईकोर्ट के 8 जनवरी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका और गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी।

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