शिक्षक दिवस पर राज्यपाल रमेश बैस ने कहा- शिक्षक संसार के रचनाकार, उन पर ही समाज को दिशा प्रदान करने का अहम दायित्व

News Aroma Media
4 Min Read

रांची: झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि युवाओं को गढ़ने में शिक्षकों की अहम भूमिका होती है। राज्यपाल रविवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर रांची विश्वविद्यालय की ओर से आर्यभट्ट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि आज भारत के द्वितीय राष्ट्रपति भारतरत्न डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती है। उनकी जयंती को हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं।

सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व में जहां एक ओर धार्मिकता थी, वहीं दूसरी ओर शास्त्रों के स्वाध्याय में गहरी रूचि थी।

उनका मत था कि उचित शिक्षा से ही समाज में मौजूद, समस्याओं का समाधान हो सकता है जिसके लिए अपनी शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

Image

- Advertisement -
sikkim-ad

शिक्षक संसार के रचनाकार हैं। उन पर ही समाज को दिशा प्रदान करने का अहम दायित्व है। उन्होंने कहा कि युवाओं को गढ़ने में शिक्षकों की अहम भूमिका होती है।

ठीक ही कहा गया है कि कोई भी देश सोने, चांदी अथवा वहाँ पाये जाने वाले बहुमूल्य सम्पदा के आधार से महान नहीं बनता, बल्कि जिस देश के बच्चे महान होंगे, वही देश महान होगा।

निश्चय ही बच्चे और युवा राष्ट्र की संपत्ति हैं और भावी भारत के कर्णधार हैं। आज के इन युवा और बच्चों की नैतिक और चारित्रिक आधारशिला मजबूत बनाई जाए तो यही बच्चे आने वाले वर्षों में स्वर्णिम भारत के सपने को साकार करेंगे।

शिक्षक का काम ज्ञान को प्राप्त करना और उसे बांटना है। शिक्षा का लक्ष्य ना सिर्फ ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना होना चाहिये बल्कि निरंतर सीखते रहने की प्रवृत्ति भी होनी चाहिये।

Image

शिक्षक का जीवन समाज के समक्ष आदर्श रूप में होना चाहिये, जिससे वह अपने चरित्र से विद्यार्थियों को प्रेरणा दे सके।

शिक्षा को महादान के रूप में स्वीकार किया गया है, शिक्षा मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास के लिए परमावश्यक है।

आपके असली सम्मान ये गौरवमयी विद्यार्थी ही हैं। शिक्षक का असली सम्मान तब होता है जब कोई विद्यार्थी यह कहता है कि उसकी सफलता के पीछे उसके शिक्षक का विशेष हाथ है तथा उनका मार्गदर्शन मिल रहा है मेरा यह मानना है कि वर्तमान शिक्षा में आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देकर विद्यार्थियों को अच्छी तरह से सुसंस्कारित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य मात्र पैसा कमाना नहीं होना चाहिये।

मुझे यह कहते हुए हर्ष हो रहा है कि करोना जैसी वैश्विक महामारी के दौर में भी हमारे शिक्षकों ने नई तकनीक के माध्यम से ऑनलाईन कक्षा लेकर विद्यार्थियों का ज्ञानवर्द्धन किया है। उन्हें मार्गदर्शन प्रदान करने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि राज्य में उच्च शिक्षा का ऐसा वातावरण बने कि अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी यहां आने की मंशा रखे।

यह राज्य एक एजूकेशन हब बने। इस कार्य में आप शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस अवसर पर कुलपति प्रो कामिनी कुमार सहित अन्य शिक्षक और बच्चे मौजूद थे।

Share This Article