नियमावली को लेकर झारखंड सरकार के फैसले के खिलाफ अपने संघर्ष की रणनीति का सोमवार को एलान करेंगे पारा शिक्षक

News Aroma Media
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रांची: सेवा शर्त नियमावली के प्रारूप में सरकार ने वेतनमान की जगह मानदेय बढ़ोतरी की बात कर राज्य के पारा शिक्षकों को नाराज कर दिया है।

पारा शिक्षक सरकार के इस कदम को उनके साथ किया गया धोखा बता रहे हैं। रविवार को राज्य के सभी जिलों में पारा शिक्षकों ने इसके खिलाफ बैठक की।

इसमें पारा शिक्षकों ने फैसला किया कि वे सरकार के इस निर्णय के खिलाफ अपने संघर्ष की रणनीति का एलान सोमवार को करेंगे।

एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से कहा गया है कि वेतनमान के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी। पारा शिक्षकों के मानदेय में हर साल 10 फीसदी की बढ़ोतरी तो पहले का ही फैसला है।

करीब तीन साल की मानदेय वृद्धि नहीं हो सकी है और अब हेमंत सोरेन सरकार वही वृद्धि करना चाह रही है।

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एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रद्युम्न सिंह (सिंटू) और ऋषिकेष पाठक का कहना है कि शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने खुद ही घोषणा की थी कि बिहार मॉडल लागू करेंगे। वहीं, राज्य सरकार की कमिटियों द्वारा भी 5200-20,200 का वेतनमान देने की अनुशंसा की गयी थी।

उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ आकलन परीक्षा या शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर अटक रहा था। अगर प्रशिक्षित पारा शिक्षकों की आकलन परीक्षा के स्थान पर शिक्षक पात्रता परीक्षा को ही मानक निर्धारित किया जाता है, तो ऐसा किया जा सकता है।

एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा का कहना है कि प्रस्तावित नियमावली बिहार मॉडल नहीं है। पारा शिक्षकों के साथ हुई बातचीत में शिक्षा मंत्री ने बिहार मॉडल पर चर्चा की थी।

बिहार में नियोजित शिक्षकों को दिये जा रहे वेतनमान पर सहमति बनी। लेकिन, प्रस्तावित नियमावली में तो बिहार मॉडल को शामिल ही नहीं किया गया है।

मोर्चा का कहना है कि नियमावली के प्रारूप में जो प्रस्ताव हैं, उन पर तो पारा शिक्षकों के साथ कभी चर्चा ही नहीं की गयी। सरकार ने ऐसा करके राज्य के 65 हजार पारा शिक्षकों को धोखा दिया है।

पारा शिक्षकों के स्थायीकरण और उन्हें वेतनमान देने का मुद्दा झामुमो ने अपने घोषणापत्र में भी शामिल किया था। तब हेमंत सोरेन ने कहा था कि उनकी सरकार बनने के तीन महीने के अंदर पारा शिक्षकों का स्थायीकरण कर दिया जायेगा। पारा शिक्षकों को वेतनमान भी दिया जायेगा।

मोर्चा ने कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बने अब दो साल हो रहे हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक अपना वादा पूरा नहीं किया। उन्होंने मानदेय वृद्धि का चारा फेंक कर पारा शिक्षकों को ठगने का काम किया है।

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