Wakf Amendment Bill 2025 in Lok Sabha: लोकसभा में बुधवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया गया, लेकिन चर्चा कब मजाक-मस्ती में बदल गई, किसी को पता ही नहीं चला। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक को सदन में रखा, लेकिन सारा ध्यान उस पल पर चला गया जब समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और गृह मंत्री अमित शाह के बीच तंजों की बौछार शुरू हो गई।
अखिलेश का तंज, शाह का करारा पंचलाइन
बिल पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने सरकार पर तंज कसा और सीधे बीजेपी के अध्यक्ष पद का मुद्दा उठा लिया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा—
जो खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताते हैं, वो अभी तक अपना अध्यक्ष तक नहीं चुन पाए हैं!
बस फिर क्या था! गृह मंत्री अमित शाह ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, जो संसद में ठहाकों की वजह बन गया।
“अखिलेश जी, आपने चुटकी ली है, तो मैं भी हल्के मूड में जवाब दूंगा। हमारे यहां अध्यक्ष चुनने के लिए 12-13 करोड़ कार्यकर्ता हैं, इसलिए थोड़ा वक्त लगता है। लेकिन आपकी पार्टी में तो चुनाव बस पांच लोगों के बीच ही सिमट जाता है, इसलिए जल्दी हो जाता है!”
ठहाकों से गूंज उठा सदन, विपक्ष-सत्ता पक्ष सब हो गए एक!
शाह के इस जवाब पर संसद में ठहाके गूंज उठे। खुद अखिलेश यादव और डिंपल यादव भी हंसने लगे। ऐसा नज़ारा कम ही देखने को मिलता है जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता एक ही मजाक पर हंसते दिखें।
बीच बहस में हंसी-मज़ाक, लेकिन सरकार ने रखी अपनी बात!
इस पूरे मजेदार घटनाक्रम के बावजूद, सरकार ने अपने इरादे साफ कर दिए। किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि—
सरकार धार्मिक स्थलों के कामकाज में कोई दखल नहीं देगी।
विधेयक केवल प्रशासनिक सुधारों और संपत्ति विवादों को सुलझाने के लिए लाया गया है।
राज्य सरकारों को वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों में निर्णय लेने का अधिकार होगा।
विपक्ष की चिंता पर सरकार की सफाई
विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस विधेयक से सरकार को वक्फ संपत्तियों पर अधिक नियंत्रण मिल जाएगा। हालांकि, सरकार ने इसे सिरे से नकारते हुए कहा कि बिल का उद्देश्य सिर्फ पारदर्शिता और स्पष्टता लाना है।