रांची: झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव ने कहा कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय, आरबीआई और राज्य सरकार के बीच त्रिपक्षीय एकरारनामा को पार्टी उचित नहीं मानती।
इसलिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में जनहित में इस त्रिपक्षीय समझौते से अलग होने का फैसला लिया गया है।
उरांव ने गुरुवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि जिसके तहत अनुसूचित जनजाति, छात्रवृत्ति, महिलाओं के उत्थान, राज्य की विभिन्न योजनाओं की राशि के काटे जाने से राज्य का हर वर्ग प्रभावित हो रहा था।
राज्य सरकारों का पैसा जो केंद्र सरकार के पास बकाया है वह तो नहीं दिया जा रहा है।
वहीं डीवीसी हमारा पैसा लेकर कोल कंपनियों को देती है, लेकिन कोल कंपनी जिसके ऊपर झारखंड सरकार का हजारों करोड़ रुपए बकाया है। झारखंड की सरकार को नहीं दे रही है।
विभिन्न राज्यों पर डीवीसी का हजारों करोड़ रुपये बकाया है जिसका भुगतान नहीं किया जा रहा है, लेकिन केंद्र की सरकार इस दूसरे राज्यों के मामले में खामोश है।
उन्होंने कहा कि डीवीसी और केंद्र सरकार की सुनियोजित साजिश के तहत झारखंड के वेलफेयर के मार्ग को अवरुद्ध किया जा रहा है।
उरांव ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि जेपीएससी नियुक्ति प्रक्रिया नियमावली में किया गया संशोधन फुल प्रूफ बनाया गया है।
जेपीएससी के तहत प्रतिवर्ष नौकरी का मार्ग प्रशस्त होगा एवं बार-बार केस होने की भी उम्मीद नहीं के बराबर होगी जिससे झारखंड के बच्चों को रोजगार मिलने की दिशा में सार्थक एवं कारगर कदम साबित होंगे एवं सुचारु रुप से नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ होगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा के द्वारा बनाई गई नियमावली कमजोर थी, जिसके कारण परीक्षाएं भी बाधित होती थी और बच्चों का भविष्य सफर कर रहा था।
इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोर नाथ शाहदेव और राजेश गुप्ता छोटू भी मौजूद थे।