पेसा नियमावली से गांवों को मिलेगी ताकत, शोषण पर लगेगी रोक : सुप्रियो भट्टाचार्य

News Update
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Supriyo Bhattacharya Said: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य (Supriyo Bhattacharya) ने कहा है कि पेसा नियमावली को लागू कर हेमंत सोरेन सरकार ने आदिवासी और ग्रामीण समाज को शोषण से आज़ादी दिलाने की दिशा में मजबूत कदम उठाया है।

उन्होंने कहा कि इससे वनोपज, बालू और गिट्टी के अवैध कारोबार पर लगाम लगेगी और उन ताकतों का प्रभाव भी खत्म होगा, जिन्हें अब तक भारतीय जनता पार्टी का संरक्षण मिलता रहा है।

ग्राम सभाओं को मिलेगा अधिकार

पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि नियमावली लागू होने के बाद गांव की ग्राम सभाएं खुद अपने फैसले लेंगी। अब किसी दबाव में आकर खनन लीज़ लेना संभव नहीं होगा।

उन्होंने बताया कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई रुकेगी और केंदू पत्ता समेत अन्य वनोपज की लूट पर भी प्रभावी रोक लगेगी। यह प्रक्रिया शोषण-मुक्त गांवों की ओर बड़ा कदम है।

BJP पर तीखा हमला

सुप्रियो भट्टाचार्य ने BJP नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज पेसा नियमावली पर सवाल उठा रहे हैं, वे पहले केंद्र में जनजातीय मामलों के मंत्री और राज्य में कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

इतने लंबे कार्यकाल में उन्होंने पेसा को सही तरीके से लागू करने के बजाय केवल अपनी जाति ‘पातर मुंडा’ को एसटी सूची में शामिल कराने पर ज़ोर दिया।

उन्होंने सवाल किया कि अगर पेसा नियमावली गलत है, तो मांझी, मानकी, मुंडा, डोकलो और सोहोर जैसे पारंपरिक ग्राम प्रधान इसके खिलाफ खुलकर सामने क्यों नहीं आ रहे हैं। सिर्फ भाजपा को ही इससे परेशानी क्यों हो रही है।

पुरानी सरकारों पर भी उठाए सवाल

उन्होंने पांचवीं अनुसूची क्षेत्र का ज़िक्र करते हुए कहा कि पहले की सरकारों के समय कई गलत परंपराएं चलीं।

उन्होंने बताया कि एक समय टीएसी का अध्यक्ष गैर-आदिवासी रहा और बाबूलाल मरांडी के शासनकाल में डोमिसाइल नीति को लेकर बड़ा विवाद हुआ। तपकरा जैसी घटनाओं में आदिवासियों पर गोलियां भी चलीं।

उन्होंने कहा कि भाजपा को झारखंड पर सवाल उठाने से पहले छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे भाजपा शासित राज्यों में पेसा की स्थिति साफ करनी चाहिए।

शोषणकारी सौदों पर लगेगी रोक

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पेसा नियमावली से वह व्यवस्था खत्म होगी, जिसमें 10 किलो महुआ के बदले सिर्फ एक किलो सरसों तेल या 5 किलो महुआ के बदले एक किलो चीनी देकर ग्रामीणों को ठगा जाता था। अब ऐसे सौदों की कोई जगह नहीं रहेगी।

निशा उरांव के बयान पर प्रतिक्रिया

अखिल भारतीय सेवा की अधिकारी निशा उरांव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह मामला ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट से जुड़ा है और प्रशासन को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

Share This Article