Political conflict over Wakf Bill in Jharkhand:संसद में वक्फ संशोधन बिल पास होते ही झारखंड की सियासत में हलचल तेज हो गई है। राज्य की सत्तारूढ़ झामुमो-कांग्रेस गठबंधन और विपक्षी भाजपा के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। एक ओर जहां कांग्रेस और झामुमो इसे अल्पसंख्यकों और आदिवासियों के अधिकारों पर हमला बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे ऐतिहासिक और सराहनीय फैसला बताकर समर्थन दे रही है।
कांग्रेस और झामुमो ने बताया अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला
झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और राज्य सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज कराया। शिल्पी तिर्की ने इस कानून को देश की अल्पसंख्यक आबादी, विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिये अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों को छीनने की कोशिश हो रही है और आने वाले समय में अन्य समुदायों को भी इसका नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने भाजपा पर आदिवासी विरोधी होने का भी आरोप लगाया।
भाजपा ने किया बिल का समर्थन, कांग्रेस पर लगाए भ्रम फैलाने के आरोप
विपक्षी भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के विरोध को झूठा और भ्रामक करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता राफिया नाज ने कांग्रेस को आदिवासी हितों का विरोधी बताते हुए कहा कि वह समाज में केवल डर और गलतफहमियां फैला रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का आदिवासी हितैषी होने का दावा हास्यास्पद है, क्योंकि असल में वह केवल राजनीतिक लाभ के लिए बयानबाजी कर रही है।
समीर उरांव ने बताया आदिवासी हितों की सुरक्षा करने वाला कानून
भाजपा जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह संशोधन आदिवासी समुदाय के हितों को सुरक्षित रखने वाला है। उन्होंने बताया कि ‘धारा 3डी’ के तहत अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्रों की जमीनों को वक्फ संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट प्रावधान है कि आदिवासियों से जुड़ी किसी भी भूमि को वक्फ के तहत नहीं लाया जा सकता, जिससे उनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
राजनीतिक लड़ाई बनी अधिकारों की व्याख्या का मंच
वक्फ संशोधन बिल को लेकर झारखंड में जो बयानबाजी जारी है, उसने इसे केवल एक कानून न रहकर राजनीतिक विमर्श का विषय बना दिया है। दोनों पक्ष इसे अधिकारों की रक्षा या हनन से जोड़ रहे हैं। जहां कांग्रेस और झामुमो अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की बात कर रहे हैं, वहीं भाजपा इसे आदिवासियों की जमीन की रक्षा के रूप में प्रचारित कर रही है। झारखंड की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले समय में और गहराने के आसार हैं।