क्राइम पर 3 महीने में तैयार करें मीडिया ब्रीफिंग के लिए मैन्युअल, सुप्रीम कोर्ट ने…

SSG ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार मीडिया ब्रीफिंग को लेकर दिशा-निर्देश तय करके कोर्ट को इसके बारे में बताएगी।

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नई दिल्ली : आपराधिक मामलों में मीडिया ट्रायल को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ा दखल देते हुए केंद्र सरकार से पुलिस की मीडिया ब्रीफिंग (Media Biefing) पर विस्तृत दिशा-निर्देश तय करने को कहा है।

चीफ जस्टिस DY चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने मीडिया ब्रीफिंग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय को तीन महीने में विस्तृत मैन्युअल तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही देश के सभी राज्यों के DGP को एक महीने के भीतर गृह मंत्रालय (Home Ministry) को सुझाव देने के लिए कहा गया है।

कोर्ट ने कहा कि यह बेहद अहम मामला

कोर्ट ने कहा कि यह बेहद अहम मामला है, क्योंकि इसमें बड़े पैमाने पर जनता का हित जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि लोगों को सूचना हासिल करने का अधिकार है, लेकिन ब्रीफिंग में जांच के दौरान अहम सबूतों का अगर खुलासा हो तो जांच भी प्रभावित हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि हमें मुलजिम के अधिकार का भी ध्यान रखना है, क्योंकि मीडिया ट्रायल से उनका हित प्रभावित होता है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह तीन महीने में Media Biefing के लिए पुलिस को प्रशिक्षित करने के लिए दिशा-निर्देश तय करें। चीफ जस्टिस ने कहा कि किसी भी दशा में मीडिया ट्रायल की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस बारे में विचार करना होगा कि मीडिया ब्रीफिंग के लिए पुलिस को कैसे प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

गोपाल शंकरनारायण ने कोर्ट में मीडिया की लापरवाही का किया जिक्र

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने कोर्ट में आरुषि मामले में मीडिया की लापरवाही का जिक्र करते हुए कहा कि हम मीडिया को रिपोर्टिंग करने से नहीं रोक सकते, लेकिन पुलिस को संवेदनशील होने की जरूरत है। SSG ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार Media Biefing को लेकर दिशा-निर्देश तय करके कोर्ट को इसके बारे में बताएगी।

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