नई दिल्ली: पूर्व मंत्री एमजे अकबर की ओर से पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ दायर मानहानि के मामले पर राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रिया रमानी ने कहा कि एमजे अकबर पाक-साफ नहीं हैं।
आज प्रिया रमानी की ओर से वकील रेबेका जॉन ने अपनी दलीलें पूरी कर लीं।
इस मामले पर अगली सुनवाई 22 दिसम्बर को होगी जब एमजे अकबर की ओर से दलीलें पेश की जाएंगी।
सुनवाई के दौरान रेबेका जॉन ने कहा कि एमजे अकबर पाक-साफ नहीं हैं।
एमजे अकबर ने अपनी पूरी शिकायत में प्रिया रमानी के आलेख और ट्वीट का जिक्र किया है।
पर इसके साथ ही एमजे अकबर को दूसरी 15 महिलाओं की शिकायतों के बारे में भी निष्पक्ष खुलासा करना चाहिए था।
ये महिलाएं एक-दूसरे को नहीं जानती थीं। उन्होंने कहा कि गजाला वहाब ने अपने अनुभवों के बारे में लिखा था।
दूसरी महिलाओं ने भी ट्विटर पर लिखा था, लेकिन उन्होंने केवल हमारे खिलाफ शिकायत की।
अकबर को ये जरूर बताना चाहिए कि जिन दूसरी महिलाओं ने ये शिकायत की कि उनकी शिकायत भी झूठी हैं। अकबर तथ्यों को छिपा रहे हैं।
जॉन ने कहा कि अकबर ने पूर्व में अपने को दोषी ठहराये जाने की बात छिपाई।
उन्हें बताना चाहिए था कि उन्हें हाईकोर्ट की ओर से कोर्ट की अवमानना का दोषी करार दिया गया था। इससे साफ है कि अकबर पाक-साफ व्यक्ति नहीं हैं।
जॉन ने कहा कि मानहानि की धारा में साफ लिखा है कि अगर जनहित में सही बात कही गई है तो वह मानहानि नहीं है।
जॉन ने हाईकोर्ट के हाल के एक आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि आरोप लगाने वाली महिला के खिलाफ मानहानि का केस कर आप उसे दंडित कर रहे हैं। ऐसा करने से दूसरी महिलाओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
सुनवाई के दौरान रेबेका जॉन ने कहा था कि वे ये मानती हैं कि मीटू ने महिलाओं को एक प्लेटफार्म दिया।
यह अभियान 2018 में भारत आया। उन्होंने कहा था कि मीटू पर बोलना अपराध नहीं है बल्कि यह एक हिम्मत की बात है। इन बातों के लिए किसी के खिलाफ अवमानना का मामला नहीं चलाया जाना चाहिए।
कई महिलाओं ने इसके बारे में बोला है। जॉन ने कहा था कि एमजे अकबर के बारे में कई महिलाओं ने बोला।
उन्होंने कहा था कि बचाव पक्ष की गवाह गजाला वहाब ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने प्रिया रमानी के पहले ही 6 अक्टूबर, 2018 को ट्वीट किया था। जॉन ने कहा कि प्रिया रमानी ने जनता के हित में बोला।
उल्लेखनीय है कि एमजे अकबर ने 15 अक्टूबर, 2018 को प्रिया रमानी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
उन्होंने प्रिया रमानी द्वारा अपने खिलाफ यौन प्रताड़ना का आरोप लगाने के बाद ये आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। 18 अक्टूबर, 2018 को कोर्ट ने एमजे अकबर की आपराधिक मानहानि की याचिका पर संज्ञान लिया था।
25 फरवरी, 2019 को कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और पत्रकार एमजे अकबर द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मामले में पत्रकार प्रिया रमानी को जमानत दी थी।
कोर्ट ने प्रिया रमानी को दस हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी थी। कोर्ट ने 10 अप्रैल, 2019 को प्रिया रमानी के खिलाफ आरोप तय किए थे।