झारखंड की लोककला और नागपुरी भाषा को नई पहचान दिलाने वाले प्रोफेसर डॉ बीरेन्द्र महतो को मिलेगा डॉ भीमराव अंबेडकर राष्ट्र गौरव अवार्ड

डॉ महतो को वर्ष 2005 में कठपुतली कला के लिए 'झारखंड रत्न प्रोत्साहन सम्मान', 2010 में नागपुरी भाषा-साहित्य और पत्रकारिता के लिए 'पीटर शांति नवरंगी हीरानागपुर साहित्य सम्मान', और 2011 में झारखंड सरकार द्वारा एक लाख रुपए का पुरस्कार मिल चुका है। वर्ष 2024 में उन्हें 'रवींद्र नाथ टैगोर गौरव सम्मान' भी प्रदान किया गया।

Smriti Mishra
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Professor Dr. Birendra Mahato, who gave a new identity to Jharkhand’s folk art and Nagpuri language:रांची विश्वविद्यालय के टीआरएल संकाय के नागपुरी विभाग के प्राध्यापक डॉ बीरेन्द्र कुमार महतो को ‘डॉ भीमराव अंबेडकर राष्ट्र गौरव अवार्ड 2025’ से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें उत्तर प्रदेश के फतेहाबाद (आगरा) में 14 अप्रैल को डॉ अंबेडकर जयंती के अवसर पर प्रदान किया जाएगा। बृजलोक साहित्य कला संस्कृति अकादमी के मुख्य अध्यक्ष डॉ मुकेश कुमार ‘ऋषि वर्मा’ ने पत्र जारी कर इसकी जानकारी दी है।

झारखंड की लोककला के संरक्षण के लिए किया गया चयन

डॉ महतो को यह सम्मान झारखंड में लुप्त होती कठपुतली कला और नागपुरी भाषा के संरक्षण एवं संवर्द्धन के क्षेत्र में उनके सराहनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है।

नेत्रहीन बच्चों को दिया पपेट मेकिंग का प्रशिक्षण

डॉ बीरेन्द्र महतो ने झारखंड के कई जिलों में पपेट मेकिंग का प्रशिक्षण देकर लोगों को इस लोककला के प्रति जागरूक किया। उन्होंने संत मिखाइल नेत्रहीन विद्यालय (बहुबाजार, रांची) के छात्र-छात्राओं को भी पपेट मेकिंग और नाटक प्रस्तुत करने का प्रशिक्षण दिया।

पहले भी मिल चुके हैं कई बड़े सम्मान

डॉ महतो को वर्ष 2005 में कठपुतली कला के लिए ‘झारखंड रत्न प्रोत्साहन सम्मान’, 2010 में नागपुरी भाषा-साहित्य और पत्रकारिता के लिए ‘पीटर शांति नवरंगी हीरानागपुर साहित्य सम्मान’, और 2011 में झारखंड सरकार द्वारा एक लाख रुपए का पुरस्कार मिल चुका है। वर्ष 2024 में उन्हें ‘रवींद्र नाथ टैगोर गौरव सम्मान’ भी प्रदान किया गया।

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