रामगढ़ : पंजाब रेजिमेंटल सेंटर ने डीएवी बरकाकाना में लगाई हथियारों की प्रदर्शनी

Central Desk
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रामगढ़: भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1971 में हुआ युद्ध आज भी ऐतिहासिक तौर पर जाना जाता है। उस वक्त पंजाब रेजिमेंटल सेंटर के 120 जवानों की बटालियन ने पाकिस्तान की टैंक रेजीमेंट को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था।

उस वक्त इस्तेमाल हुए हथियार आज भी रामगढ़ के पीआरसी के हथियार खाने की शोभा बढ़ा रहे हैं। उन हथियारों की प्रदर्शनी मंगलवार को डीएवी बरकाकाना परिसर में लगाई गई।

इस कार्यक्रम का आयोजन भारत की जीत के 50वें वर्ष के उपलक्ष्य में हुआ, जिसे भारतीय सेना द्वारा स्वर्णिम विजय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। यह कार्यक्रम देश के बच्चों के बीच राष्ट्र भावना पैदा करने के उद्देश्य से किया गया।

इसके अलावी बच्चों में देशभक्ति की भावना और सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करने का भी प्रयास किया गया।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डॉ उर्मिला सिंह सहित लेफिटनेंट कर्नल नीलेश भागवत को स्कूल के एनसीसी कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफर ऑनर के साथ शहीद स्थल स्थल अमर जवान तक लाया गया।

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जहां अतिथियों द्वारा अमर जवान शहीद स्मारक पर पुष्प गुच्छ चढ़ाकर वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी गई। तत्पश्चात डीएवी गान और ग्रीन वेलकम के बाद दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए डॉ उर्मिला सिंह ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम का आयोजन डीएवी बरकाकाना के लिए गौरवशाली क्षणों में से एक है। क्योंकि यह हमारे छात्रों को सशस्त्र बलों में शामिल होने और राष्ट्र की सेवा करने के लिए एक प्रोत्साहन देगा।

उन्होंने 1971 के वर्ष को भी याद किया जब बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण करने वाले पाकिस्तानी सैनिकों को रामगढ़ के सैन्य शिविर में तैनात किया गया था।

लेफ्टिनेंट कर्नल नीलेश भागवत ने अपने संबोधन में छात्रों को सेना के पवित्र कर्तव्य के बारे में बताया और छात्रों से सशस्त्र बलों में शामिल होने की अपील की। इस शस्त्र प्रदर्शन में क्षेत्र अंतर्गत 10 अन्य स्कूलों के 500 छात्रों को भी आमंत्रित किया गया था।

लेफ्टिनेंट कर्नल नीलेश भागवत और अन्य सैन्यकर्मियों ने प्रदर्शन के लिए रखे विभिन्न हथियारों के बारे में बताया। पंजाब रेजीमेंट के जवानों ने युद्ध की स्थितियों में दुश्मन को बेअसर करने का एक कार्य भी प्रदर्शित किया।

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