रांची: राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की ओर से शनिवार को चारा घोटाला के सबसे बड़े आरसी-47ए-96 मामले में से बहस जारी है। बहस सीबीआई के विशेष न्यायाधीश सुधांशु कुमार शशि की अदालत में हुई।
लालू के अधिवक्ता प्रभात कुमार ने आंशिक बहस की। बहस के दौरान सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक बीएमपी सिंह भी उपस्थित थे।
मामले में लालू की ओर से बताया गया कि तत्कालीन पशुपालन विभाग के निदेशक राम राज राम को निदेशक बनाने में उनका कोई हाथ नहीं था।
वह हरिजन थे, इसलिए उनको निदेशक बनाने के लिए 1988 में एक पत्र लिखा था। राम राज राम को निदेशक हमने नहीं बनाया था। उस वक्त चीफ मिनिस्टर भागवत झा आजाद थे , उन्होंने उन्हें निदेशक बनाया था।
ऑफिसर महेंद्र प्रसाद और डीपी श्रीवास्तव की ओर से बहस हुई। दोनों ने अदालत को बताया कि आपूर्तिकर्ता के बिल आता था, उसको हमने पास किया।
दोनों ने कहा कि कोई नियम का उल्लंघन हमलोगों ने नहीं किया है। हमलोग निर्दोष हैं। यह मामला पशुपालन घोटाला आरसी-47 ए / 96 डोरंडा कोषागार से 139. 35 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का है।
इस मामले में लालू सहित कई राजनीतिज्ञ, सचिव स्तर के पूर्व अधिकारी, डॉक्टर और आपूर्तिकर्ता सहित 110 आरोपियों की ओर से बहस चल रही है।