झारखंड में इंटरनेट व स्मार्टफोन की कमी से ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना टीकाकरण पर खतरा

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खूंटी: खूंटी जिला जनजाति बहुल क्षेत्र है, जो अधिकांश ग्रामों में निवास करती है।

यहां पर एक ओर तो अंधविश्वास एवं जानकारी के अभाव कारण लोग वैक्सीनेशन कराने से डर रहे हैं।

साथ ही इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि यहां के ग्रामीणों के अधिकतर लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं है।

कोविन एप्प व आरोग्य सेतु एप्प जिससे टीकाकरण का रजिस्ट्रेशन होता है, की जानकारी इन ग्रामीणों को नहीं है।

इंडियन टेलीकॉम सर्विसेज परफॉर्मेंस इंडिकेटर रिपोर्टर बताती है कि पूरे देश में 34.06 प्रतिशत ग्रामीण आबादी ही इंटरनेट सब्सक्राइबर है, बाकी लोग या तो साधारण मोबाइल का प्रयोग करते हैं या फिर स्मार्ट फोन यूज़ नहीं करते।

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ऐसे में सरकार उनका वैक्सीनेशन किस आधार पर करेगी, यह सोचने वाली बात है।

वैसे तो कोविन एप्प व आरोग्य सेतु एप्प के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करा कर वैक्सीनेशन किया जा रहा है।

यह शहरी क्षेत्रों के लिए तो ठीक है, लेकिन खूंटी जैसे सेमीअर्बन क्षेत्र के लिए कारगर नहीं है।

इससे झारखंड के वैक्सीनेशन प्रोग्राम पर भी खतरा हो सकता है और झारखंड का एक बड़ा समूह कोविड टीकाकरण से वंचित हो सकता है।

लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार ने कोरोना वैक्सीनेशन का जो मापदंड तय किया गया है, उसमें सुधार करने की आवश्यकता है, ताकि सभी लोगों को इससे फायदा मिल सके और सभी लोग मिलकर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को हरा सकें।

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