पारा शिक्षकों को लेकर केंद्र के इस फैसले से बढ़ेंगी मुश्किलें, कहा- पारा शिक्षकों की संख्या हुई कुछ कम ; जानें सरकार पर कैसे बढ़ेगा बोझ

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रांची: झारखंड सरकार ने 3241 कराेड़ रुपए का बजट केंद्र काे भेजा था। इनमें से सिर्फ 1942 कराेड़ रुपए ही पास हुए।

हालांकि पिछले साल का बकाया 212 कराेड़ रुपए स्वीकृत कर दिया गया। अब इस साल झारखंड काे कुल 2154 कराेड़ रुपए मिलेंगे।

पिछले वित्तीय वर्ष में भी पैब ने करीब 2400 कराेड़ रुपए का बजट पास किया था। इस बार उससे भी 458 कराेड़ रुपए कम स्वीकृत हुए।

इसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के प्राेजेक्ट एप्रूवल बाेर्ड ने झारखंड के समग्र शिक्षा अभियान के लिए भेजे गए बजट प्रस्ताव में 1299 कराेड़ रुपए की कटाैती कर दी है।

पारा शिक्षकों के मानदेय के लिए दी जानेवाली राशि में 151 करोड़ रुपये कम मिले

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केंद्र का कहना है कि पिछले साल पारित हुई कई याेजनाओं की शुरुआत ही नहीं हुई। ऐसे में बजट बढ़ाने का काेई कारण नहीं दिखता।

राज्य सरकार पिछले साल दिए गए पैसे का उपयाेग करे। पिछले साल पारित याेजनाएं पूरी करे। इसके बाद ही आगे के लिए विचार हाेगा।

बता दें कि पारा शिक्षकों के मानदेय के लिए दी जानेवाली राशि भी कम कर दी गई है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में पारा शिक्षकों के मानदेय के लिए केंद्र सरकार ने 781 करोड़ रुपये की मंजूरी दी हैं।

जबकि पिछले साल मानदेय के लिए 932 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गए थे। ऐसे में इस साला पिछले साल की तुलना में 151 करोड़ रुपये कम मिले हैं।

अब ऐसे में पारा शिक्षकों के मानदेय की राशि कम करने से सारा बोझ झारखंड सरकार पर पड़ेगा।

केंद्र ने कहा है कि राज्य में प्राथमिक शिक्षकों के बड़ी संख्या में पद रिक्त है। पद रिक्त होने के कारण ही उन पदों पर पारा शिक्षकों की सेवा ली जा रही है।

हालांकि, राज्य सरकार ने इसपर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए मानदेय की राशि बढ़ाने की मांग केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रलय से की है।

साथ ही, अन्य प्रस्ताव पर भी फिर से विचार करने को कहा है। बता दें कि 65 हजार पारा शिक्षकों के मानदेय पर सरकार का प्रतिवर्ष 1100 करोड़ खर्च होता है।

जानें कहां हुई कटाैती, इसकी वजह

1. 1000 स्कूलाें में इन्फाॅर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नाेलाॅजी लैब (आईसीटी) खाेलने और 1228 स्कूलाें में स्मार्ट क्लास बनाने का प्रस्ताव पैब ने नामंजूर किया।

कहा- पिछले साल 800 स्कूलाें में आईसीटी लैब स्थापित करने की मंजूरी दी गई थी। इसके लिए पैसे भी जारी किए गए थे।

उन स्कूलाें में अब तक काम ही शुरू नहीं हाे पाया। झारखंड इस साल पहले उन स्कूलाें में आईसीटी लैब स्थापित करे। दूसरे स्कूलाें में आईसीटी लैब की राशि अगले साल स्वीकृत की जाएगी।

2. कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के लिए फंड बढ़ाने के प्रस्ताव काे भी नामंजूर कर दिया गया। पैब ने कहा कि जब ये स्कूल एक साल से बंद पड़े हुए हैं ताे इस वर्ष फिर भाेजन मद में पैसे कैसे दिए जा सकते हैं।

3. पारा शिक्षक की सैलरी के लिए झारखंड ने 878 कराेड़ मांगे थे। पैब ने 781 कराेड़ रु मंजूर किए। कहा- राज्य में पारा शिक्षकों की संख्या कुछ कम हुई है। राज्य सरकार भी इनकी सैलरी का कुछ भार उठाए।

4. कई सिविल वर्क में भी कटाैती की गई है। अतिरिक्त क्लास रूम और भवन निर्माण के लिए राशि घटाई गई है। झारखंड सरकार ने दुमका-खूंटी में डायट भवन बनाने का प्रस्ताव भेजा था।

सिर्फ दुमका में डायट भवन बनाने की मंजूरी मिली। हालांकि शाैचालय निर्माण की राशि स्वीकृत हाे गई।

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