भाजपा, आरएसएस वालों के पेट में दर्द हो रहा है: बंधु तिर्की

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रांची: पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक बंधु तिर्की ने कहा कि भाजपा आदिवासियों की हितैषी होने का ढोंग ना करे।

तिर्की ने सोमवार जनजातीय सलाहकार परिषद (टीएससी) नियमावली संशोधन पर सरकार का बचाव करते हुए कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर बेवजह हाय-तौबा मचा रही है।

पिछले डेढ़ वर्षो से टीएससी गठन का मामला अटका हुआ है, तब कभी किसी भाजपा के नेता का कोई बयान नहीं आया। इस मामले पर इनके सरकार द्वारा कभी भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

जब राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा इसे सुलभ करते हुए गठन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं तो भाजपा, आरएसएस वालों के पेट में दर्द हो रहा है।

मैं भाजपाइयों को याद दिलाना चाहता हूं की छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में वर्ष 2006 में ही पीएसी के गठन को लेकर संशोधन किया था वही संशोधन अब झारखंड के वर्तमान सरकार ने किया है।

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भाजपा संशोधन करे तो सही और हमारी सरकार करें तो गलत यह दोहरी नीति भाजपा की मानसिकता दर्शाती है।

भाजपा की पूर्वर्ती सरकार द्वारा आदिवासियों की सामाजिक सांस्कृतिक आर्थिक शैक्षणिक एवं बौद्धिक विकास के लिए कुछ नहीं किया गया रोड नाली बनाने का कार्य तो सभी करते हैं।

आदिवासियों के नाम पर महज आई वास के लिए भाजपा द्वारा सियासत किया जाता है इनके द्वारा आरएसएस के एजेंडा के अनुसार समाज में जहर घोलने का काम किया जाता रहा है सरना सनातन बोलकर आदिवासियों को गुमराह करने का कार्य किया गया इतने लंबे समय तक सत्ता में रहते हुए।

भाजपा सरकार ने ट्राइबल संस्थाओं को पंगु बना दिया उन्होंने जनजातीय शोध संस्थान (TRI) झारखंड राज्य आदिवासी सहकारी विकास निगम लिमिटेड (tcdc) को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी इनके कार्यकाल में संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत जनजातीय उपयोजना (ट्राईबल सबप्लान) मद में आदिवासियों के सामाजिक,आर्थिक, शैक्षणिक उत्थान हेतु केंद्र सरकार से प्राप्त हजारों करोड़ की राशि दूसरे मद में खर्च किए गए इस राशि का उपयोग मोमेंटम झारखंड जैसी फिजूल के आयोजनों में किया गया।

झारखंड स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में किसानों और आम लोगों द्वारा जमा करोड़ों रुपए की सुरक्षा अभी संकट में है।

इसके अध्यक्ष भाजपा नेता अभय कांत प्रसाद हैं। वर्षों से निदेशक मंडल की बैठक तक नहीं हुई है इसके कई सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं पर भाजपा की सरकार ने इसे पुनर्गठित कर सशक्त बनाने में कभी रुचि नहीं दिखाई।

पूर्वर्ती सरकार में ही राज्य के कई आदिवासी समुदाय को लिपिकीय त्रुटि के कारण जनजातीय प्रमाण पत्र बनाने में आ रही कठिनाइयों के निवारण हेतु एक उप समिति का गठन किया गया था इसका क्या हल निकाला गया?

झारखंड को चरागाह समझने वाली पार्टी भाजपा कभी भी आदिवासियों की हो रही जमीन लूट पर मुखर नहीं होती।

हजारों ऐसे मामले हैं जिस पर कोर्ट द्वारा आदेश पारित होने के बावजूद आदिवासी रैयत का जमीन पर कब्जा नहीं हुई है।

इस मामले पर इनके सरकार द्वारा कभी भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

यही सब कारण रही पिछली विधानसभा चुनाव में झारखंड के आदिवासियों ने अधिकतर आरक्षित सीटों से भाजपा का सफाया कर दिया फिर भी इन्हें समझ में नहीं आ रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा सभी बाधाओं को पार करते हुए कुछ करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं तो इन्हें परेशानी हो रही है।

अगर टीएसी नियमावली में कुछ गलत है तो सुझाव दें जिस पर विचार किया जा सकता है।

साथ ही कहा कि जब भी आदिवासी और राज्य हित में कोई फैसले होते हैं तब भाजपा संगठनों को इसके विरोध में लगा देती है। मुख्यमंत्री को काम करने दें, आदिवासी की भावना भड़काकर सियासत ना करें।

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