रांची: विधायक सरयू राय ने गुरुवार को CM हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है।
पत्र के माध्यम से उन्होंने मुख्यमंत्री को तीन बिन्दुओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि ये सभी राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग से संबंधित हैं।
पहला बिन्दु CM हेमंत सोरेन गंभीर बीमारी उपचार योजना से संबंधित है। इसे 111 सेव लाईफ हाॅस्पिटल, आदित्युपर के डॉ आनन्द ने भी पूर्व में उठाया है।
दूसरा बिन्दु आदित्यपुर के 111 सेव लाईफ अस्पताल के स्वामी के व्हाट्सएप संवाद से संबंधित है और तीसरा पूर्वी सिंहभूम जिला के सिविल सर्जन द्वारा सरकारी पद से त्याग पत्र दिये बिना बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ने के बारे में है।
मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना में गड़बड़ियां हो रही है। इस योजना में गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले एवं 72,000 रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों को विभाग द्वारा सूचीबद्ध रोगों के उपचार के लिए चिकित्सा सहायता प्रदान की जाती है।
सहायता राशि सरकार द्वारा अनुबंधित अस्पतालों को अग्रिम भेज दी जाती है जहां रोगी का उपचार होना है या हो रहा है। लेकिन जमशेदपुर और आदित्यपुर में कतिपय ऐसे अस्पतालों को भी चिकित्सा राशि भेज दी गई है, जो इसके लिये सरकार की सूची में अनुबंधित नहीं है।
111 सेव लाईफ अस्पताल के चेयरमैन डा ओपी आनन्द ने इसके बारे में एक पत्र 20 जुलाई 2020 को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को लिखा था और बताया था कि इस योजना के तहत गैर अनुबंधित अस्पतालों को भी चिकित्सा राशि का भुगतान किया जा रहा है, जो नियमानुसार गलत है।
इसकी जांच होनी चाहिये और दोषियों पर कारवाई होनी चाहिये। इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि डॉ आनन्द का यह सवाल उठाना स्वास्थ्य विभाग को रास नहीं आया हो, जिसका खामियाजा वे गिरफ्तारी के रूप में भुगत रहे हैं।
जमशेदपुर के सिविल सर्जन डॉ अरविन्द कुमार लाल सरकारी नौकरी में रहते हुए 2005 में बिहार के झंझारपुर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़े। उन्होंने नामांकन में यह नहीं बताया कि वे झारखंड सरकार में पूर्वी सिंहभूम के जिला फाइलेरिया पदाधिकारी हैं।
सर्वविदित है कि सरकारी सेवा में रहते हुए कोई व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता या तो वह त्यागपत्र देकर चुनाव लड़ेगा या बिना त्यागपत्र दिये चुनाव लड़ने के लियं सरकार उसपर कारवाई करेगी। इसकी सूचना मिलने पर झारखंड सरकार ने कारवाई आरम्भ की।
एक पत्र झारखंड सरकार की ओर से बिहार के मधुबनी जिला के जिलाधिकारी सह निर्वाचन पदाधिकारी को भेजा या पत्र संलग्न है। इसके बाद क्या हुआ पता नहीं। इस बारे में सरकार ने डॉ एके लाल से स्पष्टीकरण पूछा या नहीं यह भी पता नहीं। लेकिन इतना पता है कि आरोप लगने के बाद भी उनकी प्रोन्नति होती रही, उन्हें सभी प्रकार के लाभ मिलते रहे।
प्रोन्नत होकर सम्प्रति वे पूर्वी सिंहभूम जिला के प्रभारी सिविल सर्जन पद पर पदस्थापित है।
यह मात्र संयोग भी हो सकता है कि बन्ना गुप्ता भी 2005 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर ही जमशेदपुर पश्चिम से झारखंड विधानसभा का चुनाव लड़े थे।
उपर्युक्त तीनों बिन्दु राज्यहित से संबंधित है। दो बिन्दु तो फिलहाल चर्चा का विषय बने डॉ आनन्द की गिरफ्तारी से संबंधित है।
जांच के बाद उनका मुकदमा न्यायालय में जाता है तो उन्हें जो दंड मिलना है मिलेगा या वे बरी होंगे। दोषी होंगे तो दंडित होंगे, दोषी नहीं होंगे तो बरी होंगे।
पर उनके विरूद्ध एफआइआर होते ही बिना किसी अनुसंधान के सरायकेला पुलिस द्वारा उन्हें जेल भेज दिया जाना पूर्वाग्रह से प्रेरित प्रतीत होता है। यह अनुचित है।