पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कभी निकटतम सहयोगी रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी की अटकलें तेज हो गई है। इन अटकलों ने पटेल सेवा संघ के चूड़ा-दही भोज के बाद जोर पकड़ा है। दरअसल, पटेल सेवा संघ की ओर से मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में रविवार को चूड़ा-दही भोज का आयोजन किया गया था। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह भी शामिल हुए। हालांकि, दोनों के पहुंचने का समय अलग-अलग था। मंच पर भी दोनों एक साथ नहीं दिखे। लेकिन कार्यक्रम के बाद आरसीपी सिंह ने मीडिया से जो बातचीत की उससे लगने लगा कि खरमास के बाद जदयू में उनकी वापसी हो सकती है।
आर.सी.पी. सिंह ने नीतीश कुमार को लेकर खुल कर कहा कि हम दोनों का कभी भी अलग रास्ता नहीं था, हम दोनों हमेशा एक ही थे। जितना हम नीतीश कुमार को जानते हैं, उतना शायद कोई नहीं जानता। पिछले 25 सालों से हम साथ रहे हैं। ऐसे में आर.सी.पी. सिंह की इस बात में राजनीतिक शख्सियतों के बीच लंबे समय से बने रिश्तों की गंभीरता झलकती है।

खरमास के बाद जदयू में वापसी को लेकर पूछे गए सवाल पर आर.सी.पी. सिंह ने मुस्कुराते हुए जवाब टाल दिया और कहा कि आने वाले समय में पता चल जाएगा। आरसीपी सिंह का यह बयान राजनीतिक हलकों में अटकलों और भविष्य की संभावनाओं को हवा देता है। उनके इस अंदाज़ से यह साफ है कि वापसी या फिर किसी राजनीतिक फेरबदल के संकेत अभी खुलकर सामने नहीं आए हैं, लेकिन दरवाज़ा बंद भी नहीं है। आरसीपी सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति पहले से ही नए समीकरणों की तलाश में है। जदयू लगातार संगठन को मजबूत करने में जुटी है और पुराने अनुभवी नेताओं की वापसी पार्टी के लिए फायदेमंद मानी जा रही है।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि अगर आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी होती है, तो यह न सिर्फ पार्टी के लिए बल्कि बिहार की राजनीति के लिए भी एक बड़ा घटनाक्रम होगा। फिलहाल आरसीपी सिंह ने अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। लेकिन इतना साफ है कि उनका यह बयान महज एक सामान्य टिप्पणी नहीं है। अब सबकी निगाहें खरमास के बाद होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं। क्या आरसीपी सिंह एक बार फिर नीतीश कुमार के साथ सियासी पारी शुरू करेंगे या कोई नया रास्ता चुनेंगे? इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकता है। बता दें कि आर.सी.पी. सिंह अभी जन सुराज पार्टी में हैं। विधानसभा चुनाव में आरसीपी सिंह की बेटी को भी जन सुराज पार्टी की ओर से विधानसभा का टिकट दिया गया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
इतना ही नहीं, पार्टी इस चुनाव में अपना खाता तक नहीं खोल पाई। चुनावी नतीजों के बाद यह साफ हो गया कि जन सुराज को अभी लंबा सियासी संघर्ष करना होगा। उल्लेखनीय है कि आरसीपी सिंह कभी जदयू के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। वे नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं और लंबे समय तक पार्टी की रणनीति और संगठन में अहम भूमिका निभाते रहे। हालांकि बाद में मतभेद सामने आए और उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी। लेकिन बदली परिस्थिति में आर.सी.पी. सिंह ने अपने बयान के माध्यम से यह संदेश दिया है कि उनकी नीतीश कुमार के प्रति समझ और साझेदारी सियासी बयानबाज़ी से ऊपर है| आने वाले समय में उनके राजनीतिक फैसले बिहार की राजनीति में नए रंग ला सकते हैं। ऐसे में जदयू में उनकी वापसी की अटकलें और तेज हो गई हैं।




