नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने वाले सात लोग पकड़े गए

News Aroma Media
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अहमदाबाद: कोरोना के इस कठिन समय में भी मौत के सौदागर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं।

पुलिस ने एक गिरोह के ऐसे सात लोगों को पकड़ा है जिन्होंने गुजरात के कई शहरों में 100 रुपये का टेट्रासाइक्लिन इंजेक्शन रेमडेसिविर के नाम पर बेचकर काली कमाई की है।

अब क्राइम ब्रांच यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस इंजेक्शन का मरीजों पर क्या असर पड़ा। उनके पास से 133 से अधिक नकली रेमेडिविविर इंजेक्शन जब्त किए गए हैं।

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के संयुक्त कमिशनर चेतन मांडलिक ने बताया कि क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि जय ठाकुर नाम के एक शख्स को रेमेडिविविर इंजेक्शन देने के लिए सनप्रीत चांदखेड़ा आ रहा है। इस पर

जाल बिछाकर दो लोगों को पकड़ा गया। इनके पास से हेटरो कंपनी के 20 इंजेक्शन पाए गए।

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सनप्रीत ने बताया कि वह यह इंजेक्शन पालडी निवासी अपने दोस्त राज वोरा से लाया था। क्राइम ब्रांच ने जब राज वोरा के घर की तलाशी ली तो इस दौरान 10 इंजेक्शन मिले।

पुलिस ने इनसे पूछताछ के बाद चार अन्य लोगों को पकड़ा जबकि एक आरोपित विवेक माहेश्वरी फरार है।

इनके पास से 133 नकली इंजेक्शन और 21 लाख रुपये जब्त किए गए हैं।

पकड़ा गया नीलेश 20 से 30 हजार रुपये की कीमत पर इंजेक्शन बेच रहा था। उसने अकेले ने 400 इंजेक्शन बेचे हैं।

इन सभी आरोपियों ने अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा और गुजरात के विभिन्न हिस्सों में लगभग 5,000 इंजेक्शन बेचे थे।

कोरोना के समय हितेश, दिशात और विवेक माहेश्वरी एक-दूसरे के संपर्क में आए।

इन लोगों ने 100 रुपये में टेट्रासाइक्लिन इंजेक्शन खरीदे और अहमदाबाद के रायपुर में रेमडेसिविर इंजेक्शन के स्टिकर बनाकर उस पर चिपकाकर बेचना शुरू किया।

क्राइम ब्रांच को इनके द्वारा बेचे गए इंजेक्शनों से कुछ लोगों की मौत होने का भी संदेह है। सभी अभियुक्तों के खिलाफ हत्या के आरोप के तहत जांच शुरू की गई है।

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