गोधरा कांड के 8 दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी, 4 लोगों को जमानत देने से किया मना

वहीं निचली अदालत से उम्र कैद पाने वाले 20 लोगों की सज़ा को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा था। इन सभी लोगों की अपील Supreme Court में लंबित है

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नई दिल्ली: 2002 में गुजरात (Gujarat) के गोधरा (Godhra) में साबरमती एक्सप्रेस (Sabarmati Express) के कोच में आग लगाकर 59 लोगों की हत्या के दोषी 8 लोगों को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जमानत दे दी है।

इन सभी लोगों को निचली अदालत और हाई कोर्ट (High Court) से उम्र कैद की सजा मिली थी।

सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 17-18 साल जेल में बिताने के आधार पर जमानत दी है।

हालांकि, कोर्ट ने ऐसे 4 लोगों को जमानत (Bail) से मना कर दिया है जिन्हें निचली अदालत ने मौत की सज़ा दी थी और हाई कोर्ट ने उसे उम्र कैद (Life Prison) में बदल दिया था।गोधरा कांड के 8 दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी, 4 लोगों को जमानत देने से किया मना Supreme Court acquitted 8 convicts in Godhra carnage, refused to grant bail to 4 people

इनलोगों को मिली जमानत

जिन लोगों को जमानत मिली है, उनके नाम हैं- अब्दुल सत्तार गद्दी, यूनुस अब्दुल हक, मो. हनीफ, अब्दुल रउफ, इब्राहिम अब्दुल रज़ाक़, अयूब अब्दुल गनी, सोहेब यूसुफ और सुलेमान अहमद।

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इन सभी लोगों पर ट्रेन में जल रहे लोगों को बाहर आने से रोकने का दोष साबित हुआ है।

जिन 4 लोगों को रिहा करने से कोर्ट ने आज मना कर दिया है, वह हैं- अनवर मोहम्मद, सौकत अब्दुल्ला, मेहबूब याकूब मीठा और सिद्दीक मोहम्मद मोरा।

इन पर हत्या में सीधे शामिल होने का दोष साबित हुआ है। गुजरात सरकार (Government of Gujarat) ने इनको मौत की सज़ा देने की मांग की है।

‘11 लोगों को दिया था मृत्युदंड’

मामले के कुल 31 दोषियों में से 11 को निचली अदालत ने मृत्युदंड (Capital Punishment) दिया था, जबकि 20 को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सज़ा दी थी।

अक्टूबर 2017 में गुजरात हाई कोर्ट ने 11 लोगों की फांसी की सज़ा को उम्र कैद में बदल दिया था।

वहीं निचली अदालत से उम्र कैद पाने वाले 20 लोगों की सज़ा को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा था। इन सभी लोगों की अपील Supreme Court में लंबित है।

किस आधार पर मिली जमानत?

पिछले साल दिसंबर में भी Supreme Court ने इस मामले के एक दोषी फारुक को जमानत दी थी।

निचली अदालत में फारुक पर ट्रेन के जलते डिब्बे से लोगों को बाहर आने से रोकने के लिए पथराव का दोष साबित हुआ था।

उस मामले में भी Supreme Court ने इसी बात को आधार बनाया था कि फारूक 17 साल से जेल में है।

जबकि, इस साल 18 अप्रैल को निचली अदालत से फांसी की सज़ा मिलने के कारण इरफान घांची और सिराज मेदा की जमानत याचिका (Bail Plea) सुप्रीम ठुकरा कर चुका है।

कई दोषियों की जमानत पर अभी सुप्रीम कोर्ट ने विचार नहीं किया है।

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