बिहार के मुजफ्फरपुर की मशहूर शाही लीची खाने के लिए अभी करना होगा और इंतजार

आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में लीची की खेती 36.67 हजार हेक्टेयर में होती है, जिससे 308.06 हजार मैट्रिक टन लीची का फल प्राप्त होता

News Desk
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मुज़फ्फरपुर: Bihar के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) की मशहूर शाही लीची (Famous Shahi Litchi) अब बगानों से निकलने लगी है।

लीची खाने वालों के लिए यह अच्छी खबर है बिहार के मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन (Muzaffarpur Railway Station) से शाही लीची की पहली खेप पवन एक्सप्रेस से मायानगरी मुंबई (Mumbai) के लिए रवाना हुई। हालांकि अभी लीची के लिए एक सप्ताह और इंतजार करने की बात भी कही जा रही है।

मुजफ्फरपुर की शाही लीची देश ही नहीं विदेशों तक में चर्चित है। Muzaffarpur की मशहूर शाही लीची रसीली और गुद्देदार होता है। शाही लीची की खेप अब बाहर जाने से लीची किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

बिहार के मुजफ्फरपुर की मशहूर शाही लीची खाने के लिए अभी करना होगा और इंतजार- To eat the famous Shahi Litchi of Muzaffarpur, Bihar, one has to wait more

कुल 51 कार्टन लीची मुंबई भेजी गई

मुजफ्फरपुर से लीची की पहली खेप बुधवार को पवन एक्सप्रेस (Pawan Express) से मुंबई के लिए रवाना हुई। पहले दिन कुल 51 कार्टन लीची मुंबई भेजी गई।

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व्यापारियों ने मुंबई के बाजारों में 15 सौ से लेकर दो हजार रुपये प्रति कार्टन के दर से शाही लीची बिकने की संभावना जताई है।

जयनगर (Jainagar) से जंक्शन पर बुधवार की देर शाम पहुंची Pawan Express के पार्सल बोगी में लीची लोड की गई।

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अमृतसर व लखनऊ आदि शहरों में लीची भेजी जायेगी

आने वाले दिनों में ट्रेनों से दिल्ली, अमृतसर व लखनऊ आदि शहरों में लीची भेजी जायेगी। किसानों ने बताया कि मीनापुर व कांटी इलाके (Minapur and Kanti areas) की लीची मुंबई के बाजार में शुक्रवार को पहुंच जायेगी।

रेलवे की ओर से बीस मई से लेकर बीस जून तक के लिए पवन एक्सप्रेस में अतिरिक्त पार्सल बोगी जोड़ी जायेगी।

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किसान भी इसी बारिश का इंतजार कर रहे

इधर, कहा जा रहा है कि एक-दो दिनों में अगर हल्की बारिश हो जाती है तो फिर Muzaffarpur के मशहूर शाही लीची के स्वाद और बढ जाएगी।

किसान भी इसी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि अगले एक सप्ताह में Bihar के बाजारों में भी लीची अच्छी मात्रा में पहुंच जाएगी।

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केवल लांल रंग लेने से ही तोड़ना सही नहीं: राजेंद्र प्रसाद

अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना (All India Fruit Research Project) के प्रधान अन्वेषक एवं डॉ. राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के सह निदेशक अनुसंधान डॉ एस के सिंह का कहना है कि अच्छी लीची के लिए अभी एक सप्ताह और इंतजार करना होगा।

उन्होंने कहा कि लीची अभी लाल रंग ले ली है लेकिन केवल लांल रंग लेने से ही तोड़ना सही नहीं है।

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बिहार में लीची की उत्पादकता 8.40 टन प्रति हेक्टेयर

भारत सरकार के कृषि और सहकारिता विभाग (Cooperative Department) के वर्ष 2020-2021 के आंकड़े के अनुसार भारत में 97.91 हजार हेक्टेयर में लीची की खेती हो रही है जिससे कुल 720.12 हजार मैट्रिक टन उत्पादन प्राप्त होता है।

आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में लीची की खेती 36.67 हजार हेक्टेयर में होती है, जिससे 308.06 हजार मैट्रिक टन लीची का फल प्राप्त होता है।

Bihar में लीची की उत्पादकता 8.40 टन प्रति हेक्टेयर है जबकि राष्ट्रीय उत्पादकता 7.35 टन प्रति हेक्टेयर है।

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