रांची: राजधानी रांची में सफर के लिए मेट्रो ट्रेन की तरह मेट्रो नियो की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके बाद रांची में ट्रैफिक की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।
इस संबंध में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने राज्य सरकार से प्रस्ताव मांगा है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट और हर घर जल पहुंचाने की दिशा में वृहद तरीके से काम करने की जरूरत है।
इसके लिए केंद्र सरकार जल्द ही कई योजनाएं शुरू करने जा रही है। झारखंड भी इन योजनाओं का लाभ उठाए। केंद्रीय सचिव प्रोजेक्ट भवन में नगर विकास विभाग के अधिकारियों के साथ केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे।
हर घर जल पहुंचाने की भी तैयारी
इस मौके पर नगर विकास सचिव विनय चौबे ने कहा कि जल्द ही रांची के लिए मेट्रो-नियो प्रोजेक्ट का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार 24 घंटे घर-घर जलापूर्ति को लेकर कई योजनाएं शुरू कर रही है। केंद्र को मदद के लिए शीघ्र ही प्रस्ताव भेजा जाएगा।
इसके अलावा रांची, धनबाद और जमशेदपुर में सिटी बस की योजना तैयार हो रही है। बैठक में केंद्रीय सचिव के अलावा संयुक्त सचिव अमृत अभिजात, नगर विकास सचिव विनय कुमार चौबे, नगर आयुक्त रांची मुकेश कुमार, सूडा निदेशक अमित कुमार, डीएमए निदेशक विजया जाधव और विभागीय पदाधिकारी उपस्थित थे।
क्या है मेट्रो नियो
केंद्र सरकार के नए बजट में बड़े शहरों में मेट्रो की तर्ज पर छोटे शहरों में मेट्रो नियो या मेट्रो लाइट शुरू करने की व्यवस्था है।
मेट्रो के मुकाबले ये आधे से भी कम खर्च में बनेंगे। ये छोटे शहरों में होने वाली ट्रैफिक की समस्या को काफी हद तक दूर कर सकते हैं।
रबर की टायर पर चलने वाली तीन कोच वाली इस मेट्रो के स्टेशन परिसर के लिए बड़े जगह की जरूरत नहीं होती है। यह सड़क की सतह पर भी चल सकती है।
इसमें यात्रियों के बैठने की क्षमता सामान्य मेट्रो से कम होगी। इसके हर कोच में 200-300 लोग सफर कर सकते हैं। इसका मतलब यह कि मेट्रो नियो में एक साथ 700 से 800 लोग सफर कर सकते हैं।
इसके लिए सड़क से अलग एक डेडिकेटेड कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। इस मेट्रो सिस्टम से छोटे शहर के लोगों को भी सड़क के जाम से निजात मिलेगी।
केंद्र सरकार का मानना है कि इससे छोटे शहरों की परिवहन व्यवस्था भी सुधरेगी। इसको बनाने में खर्च काफी कम आता है। अभी एक एलिवेटेड मेट्रो को बनाने में प्रति किलोमीटर का खर्च 300-350 करोड़ रुपये आता है। अंडरग्राउंड में यही लागत 600-800 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है।
जबकि एक मेट्रो नियो या मेट्रो लाइट के लिए 200 करोड़ तक का ही खर्च आता है।
रांची में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अभाव
राजधानी रांची की आबादी 15 लाख से अधिक है, लेकिन उसकी तुलना में न सड़कें हैं और न पब्लिक ट्रांसपोर्ट। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नाम पर राजधानी में महज 15 से 20 सिटी बसें ही चलती हैं, जबकि आंकड़ों के मुताबिक रांची में रोजाना तीन लाख से अधिक लोग एक से दूसरे जगह आनाजाना करते हैं।
जो डीजल ऑटो या निजी वाहनों में सफर करते हैं। शहर में रोजाना 30 हजार से अधिक ऑटो का परिचालन होता है। इसके अलावा लोग अपने वाहन से आना जाना करते हैं।
इसका बुरा असर शहर के ट्रैफिक पर पड़ता है। सुबह नौ बजे से लेकर रात के आठ बजे तक शहर की मुख्य सड़कों पर लंबा जाम लगा रहता है। ऐसे में सरकार जबतक पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर नहीं करेगी, रांची को जाम से मुक्ति नहीं मिलेगी।
योजनाओं के संचालन में झारखंड आगे
केंद्रीय सचिव ने कहा कि मिशन द्वारा संचालित योजनाओं में झारखंड देश के अग्रणी राज्यों में हमेशा से रहा है। नगर विकास सचिव विनय कुमार चौबे ने राज्य में शहरी जरूरतों, निकायों की संख्या और विकास योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की।
कहा कि हम लगातार सभी योजनाओं की क्लोज मॉनिटरिंग कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि निकाय स्तर से लेकर सरकार के स्तर तक योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई विलंब न हो।
लाइट हाउस प्रोजेक्ट से बढ़ेगा झारखंड का मान
केंद्रीय सचिव ने सुझाव दिया कि झारखंड में लाइट हाउस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा कराएं ताकि यह दूसरे प्रदेश के लिए यह एक मॉडल बने।
झारखंड में यह प्रोजेक्ट दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक से बनाया जा रहा है। विभागीय सचिव विनय कुमार चौबे ने कहा कि इसे समय पर पूरा कराया जाएगा।
उन्होंनें पीएम आवास योजना में भी और गति लाने का आश्वासन दिया। केंद्रीय सचिव ने कहा कि पीएम स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को स्वीगी!