मनीष सिसोदिया ने जमानत अर्जी में क्यों कही ये बात?, ‘हिरासत में रखने से मुझे नहीं मिलेगा कोई फायदा’

News Desk
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नई दिल्ली: शराब घोटाले (Liquor Scam) में गिरफ्तार मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) की आज CBI हिरासत (CBI Custody) खत्म हो रही है। इसके बाद उन्हें आज कोर्ट में पेश किया जाएगा।

दिल्ली (Delhi) की राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) में सिसोदिया की जमानत अर्जी पर कोर्ट आज फैसला करेगा। वहीं, सिसोदिया ने अपनी जमानत (Bail) अर्जी में कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा बुलाए जाने पर वह जांच में शामिल हो गए हैं।

मनीष सिसोदिया ने जमानत अर्जी में क्यों कही ये बात?, 'हिरासत में रखने से मुझे नहीं मिलेगा कोई फायदा'- Why did Manish Sisodia say this in his bail application? 'I will not get any benefit by keeping him in custody'

जब भी CBI द्वारा उन्हें बुलाया गया वह जांच में शामिल हुए: सिसोदिया

सिसोदिया ने जमानत याचिका (Bail Plea) में आगे कहा कि उन्हें Custody में रखने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा, क्योंकि सभी बरामदगी (Seizures) पहले ही की जा चुकी है।

साथ ही कहा कि इस मामले में गिरफ्तार (Arrest) अन्य आरोपियों (Accused) को पहले ही जमानत मिल चुकी है। सिसोदिया ने यह भी कहा कि जब भी CBI द्वारा उन्हें बुलाया गया वह जांच में शामिल हुए हैं।

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मनीष सिसोदिया ने जमानत अर्जी में क्यों कही ये बात?, 'हिरासत में रखने से मुझे नहीं मिलेगा कोई फायदा'- Why did Manish Sisodia say this in his bail application? 'I will not get any benefit by keeping him in custody'

सिसोदिया ने CBI की गिरफ्तारी को पहले सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

सिसोदिया ने दावा किया है कि उनके पास दिल्ली (Delhi) के Deputy CM का महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है और समाज में उनकी गहरी प्रतिष्ठा (Deep Reputation) है। वहीं, उनके वकील कह रहे हैं कि याचिका की कॉपी सुनवाई तक शेयर नहीं की जाएगी।

दरअसल, CBI ने सिसोदिया को 26 फरवरी को 8 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था, 27 फरवरी को कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की CBI Custody में भेज दिया था।

मनीष सिसोदिया ने जमानत अर्जी में क्यों कही ये बात?, 'हिरासत में रखने से मुझे नहीं मिलेगा कोई फायदा'- Why did Manish Sisodia say this in his bail application? 'I will not get any benefit by keeping him in custody'

सिसोदिया ने CBI की गिरफ्तारी को पहले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती दी थी, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा था कि आपको पहले Delhi HC जाना चाहिए।

जोर देकर कहा था कि जमानत (Bail) के लिए सीधे-सीधे सर्वोच्च अदालत में पहुंच जाना गलत परंपरा है।

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