CJI DY Chandrachud asked the central government: सुप्रीम कोर्ट ने Judges की नियुक्ति को लेकर शुक्रवार को केंद्र सरकार से जवाब-तलब किया। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के जजों की नियुक्तियों के लिए कॉलेजियम ने जो नाम दोबारा भेजे हैं, उन्हें अब तक मंजूरी क्यों नहीं दी गई।
CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कॉलेजियम कोई सर्च कमेटी नहीं है, जिसकी सिफारिशों को रोका जा सके।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट झारखंड सरकार और एडवोकेट हर्ष विभोर सिंघल की दो अलग-अलग याचिकओं पर सुनवाई कर रही थी।
झारखंड सरकार की याचिका एमएस रामचंद्र राव को राज्य के हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की कॉलेजियम की सिफारिश को मंजूरी न देने को लेकर थी।
एडवोकेट हर्ष विभोर सिंघल ने दूसरी याचिका दायर की जिसमें केंद्र सरकार को कॉलेजियम की सिफारिशों को मानने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय करने की मांग की गई थी।
एडवोकेट प्रशांत भूषण ने 2018 में कॉमन कॉज में दायर एक याचिका का जिक्र किया, जिसमें न्यायिक नियुक्तियों के लिए समय सीमा तय करने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि वे उन नामों की लिस्ट बनाए जो कॉलेजियम ने दोबारा भेजे हैं और बताएं कि ये क्यों पेंडिंग हैं। इसके बाद मामले को स्थगित कर दिया गया।
झारखंड सरकार की ओर से कहा गया कि पिछले चीफ जस्टिस के मामले में भी कॉलेजियम की सिफारिश को मंजूरी देने में देरी हुई।
कॉलेजियम ने 27 दिसंबर, 2023 को झारखंड के चीफ जस्टिस के रूप में उड़ीसा हाईकोर्ट के जस्टिस B.R सारंगी के नाम की सिफारिश की थी। सरकार ने 3 जुलाई, 2024 को नियुक्ति की मंजूरी दी और सारंगी 19 जुलाई को रिटायर हो गए।
वे 15 दिन ही चीफ जस्टिस रह पाए। राज्य का आरोप है कि कॉलेजियम ने चीफ जस्टिस की नियुक्ति की सिफारिश काफी पहले ही कर दी थी, लेकिन सरकार ने इस पर कार्रवाई नहीं की।
इससे न्याय प्रशासन प्रभावित हुआ है और केंद्र सरकार की देरी में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लंघन है और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
कॉलेजियम में 5 सदस्य होते हैं। सीजेआई इसमें प्रमुख होते हैं। इसके अलावा 4 मोस्ट सीनियर जज होते हैं। इसके सदस्यों में CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई शामिल हैं।
कॉलेजियम ही सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में Judges की नियुक्ति और उनके नाम की सिफारिश केंद्र से करता है। केंद्र की मंजूरी के बाद ही नए जजों की नियुक्ति होती है।