समय से पहले लड़कियों में हो रहे बड़े बदलाव, रिसर्च में किए गए बड़े खुलासे

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नई दिल्ली: समय से पहले लड़कियों में हो रहे बदलाव (Girl Changes) चिंता का कारण बनते जा रहे हैं।

इसमें सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि समय से आठ से नौ साल पहले ही सेक्शुअल लक्षण (Sexual Traits) दिखने लग रहे हैं।

Girl Changes

इसे बड़ी चिंता के रूप में देखा जा रहा है। कहा जाता है कि मानव जीवन में यौवनारम्भ या वय:सन्धि (Puberty) शारीरिक परिवर्तन की प्रक्रिया है, जिसमें बच्चे एक खास उम्र के बाद किशोरावस्था (Adolescence) में जाते हैं और उनमें शारीरिक परिवर्तन आता है।

यही परिवर्तन प्रजनन में समर्थ बनाते हैं, लेकिन अब यह सभी बदलाव समय से पहले होने लगे हैं।

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अर्ली प्यूबर्टी के लक्षण में तेजी से हुई है बढ़ोतरी

कोरोना (Coronavirus) की शुरुआत से बच्चियों में आ रहे शारीरिक परिवर्तन की वजह वायरस के संक्रमण को माना जा रहा था। इस विषय पर कई स्टडीज भी हुईं।

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लेकिन, हाल ही में रोम में हुई 60वीं यूरोपियन सोसाइटी फॉर पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी मीटिंग (European Society for Pediatric Endocrinology Meeting) में एक रिसर्च पेश की गई और इसमें कहा गया है कि लड़कियों की अर्ली प्यूबर्टी से कोरोना इन्फेक्शन का कोई लेना-देना नहीं है।

सामने आई चौंकाने वाली वजह

आप यह जानकर हैरान होंगे कि अर्ली प्यूबर्टी आने की प्रमुख वजह लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान अपने स्मार्ट गैजेट्स (Smart Gadgets) के सामने ज्यादा समय बिताना है।

इसे साबित करने के लिए तुर्की की गाजी यूनिवर्सिटी (Ghazi University, Turkey) और अंकारा सिटी हॉस्पिटल (Ankara City Hospital) के वैज्ञानिकों ने 18 मादा चूहों पर रिसर्च की. इन चूहों को तरह-तरह की LED लाइट से कम या ज्यादा वक्त के लिए एक्सपोज किया गया।

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रिसर्चर्स ने पाया कि जिन चूहों ने लाइट के सामने ज्यादा वक्त बिताया, वे दूसरों के मुकाबले जल्दी मैच्योर हुए। वैज्ञानिकों की मानें तो हमारे डिवाइस (Device) की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन हॉर्मोन (Melatonin Hormone) की मात्रा को घटा सकती है और ये हॉर्मोन हमारे दिमाग में रिलीज होता है और नींद को रेगुलेट करता है।

इसके साथ ही रिप्रोडक्शन में काम आने वाले हॉर्मोन्स की मात्रा भी बढ़ सकती है, जिससे प्यूबर्टी समय से पहले ही आ सकती है।

जानें प्यूबर्टी की नॉर्मल एज

लड़कों में प्यूबर्टी की नॉर्मल उम्र 9 साल से 14 साल के बीच होती है तो वहीं लड़कियों में ये 8 से 13 साल के बीच आती है।

लेकिन, अगर 8 की उम्र से पहले ही लड़कियों में सेकंडरी सेक्शुअल लक्षण (Secondary Sexual Symptoms) (जैसे स्तन का आकार बढ़ना, प्राइवेट पार्ट्स में बाल आना इत्यादि) आते हैं, तो उसे प्रेकोशियस प्यूबर्टी (Precocious Puberty) कहा जाता हैं।

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ऐसे मामले आजकल ज्यादा हो रहे हैं, जिसमें लड़कियों में प्यूबर्टी जल्दी आ रही है, हालांकि, हॉर्मोनल इम्बैलेंस (Hormonal Imbalance) होने की वजह अब भी अज्ञात है और अभी इस पर और रिसर्च की जरूरत है।

बहरहाल, इन सभी बदलावों के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। जैसे क्लाइमेंट चेंज, रहन सहन में बदलाव, खानपान में बदलाव आदि।

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