भ्रष्टाचार के मामलों में सरकारी कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोत्तरी

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नई दिल्ली: PM नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने भाषण में भ्रष्टाचार (Corruption) को देश की सबसे बड़ी समस्या बताया था। इसे जल्द खत्म करने की अपील भी की गई थी।

ऐसे में एक सरकारी रिपोर्ट (Official Report) में पता चला है कि साल 2021 के अंत तक भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल सरकारी कर्मचारियों की संख्या में इजाफा हो रहा है।

वहीं CBI से जुड़े कई अधिकारी और कर्मचारियों के ऊपर भी विभागीय कार्यवाही लंबित (Pending) है।

केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की हाल में सार्वजनिक हुई रिपोर्ट में बताया गया है, कि साल 2021 के अंत तक 633 सरकारी कर्मचारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के 171 मामले अभियोजन की मंजूरी के लिए अलग अलग विभागों में लंबित हैं।

इनमें से सबसे ज्यादा 325 अधिकारियों के 65 मामले Finance Ministry के वित्तीय सेवा विभाग से हैं। वहीं 67 कर्मचारियों के 12 मामले केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क विभाग से जुड़े हुए हैं।

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इसके अलावा रेल मंत्रालय (Ministry of Railways) के 30 अधिकारी और रक्षा मंत्रालय के 19 अधिकारी भ्रष्टाचार के मामले में जांच के दायरे में हैं।

 

दिल्ली सरकार के पास 36 अधिकारियों पर अभियोजन की मंजूरी की मांग को लेकर 4 मामले लंबित थे

CVC की सालाना रिपोर्ट में बताया गया है कि 2021 में उत्तर प्रदेश (UP) सरकार के पास 15 अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी की मांग को लेकर 8 मामले लंबित हैं।

वहीं 8 अधिकारियों से जुड़े 5 मामले जम्मू और कश्मीर (J&K) में भी लंबित हैं। जबकि दिल्ली सरकार के पास 36 अधिकारियों पर अभियोजन की मंजूरी की मांग को लेकर 4 मामले लंबित थे।

इन सभी सरकारी कर्मचारियों के ज्यादातर मामले देश की सबसे प्रमुख जांच Agency माने जाने वाली CBI देख रही है। ऐसे में जानकर हैरानी होगी कि साल 2021 के अंत तक के आंकड़ों के हिसाब से विभागीय कार्यवाही के 75 मामले खुद CBI के अधिकारी और कर्मचारियों पर चल रहे हैं।

इन 75 मामलों में 55 मामलेC BI के ग्रुप A अधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही से जुड़े हैं, जबकि 20 मामले ग्रुप B और C कर्मचारियों की विभागीय कार्यवाही को लेकर लंबित थे।

गौर करने वाली बात है कि साल 2021 के अंत तक CBI के ग्रुप A के 55 मामलों में 27 मामले पिछले 4 साल से ज्यादा समय से लंबित हैं। वहीं ग्रुप B और C के 20 मामलों में 9 ऐसे हैं, जो 4 साल से ज्यादा समय से लंबित हैं।

सरकार या किसी सक्षम Authority को तीन महीने के भीतर अपना फैसला सुनाना चाहिए

CVC ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 19 के तहत अभियोजन की मंजूरी देने का अनुरोध मिलने पर सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को तेजी से निर्णय लेने की जरूरत है।

इसमें कहा गया है कि संशोधित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में यह भी कहा गया है कि सरकार या किसी सक्षम Authority को तीन महीने के भीतर अपना फैसला सुनाना चाहिए।

वहीं CVC की रिपोर्ट में ये भी जानकारी भी दी गई है कि केंद्रीय जांच एजेंसी CBI में साल 2021 के अंत तक 1533 पद खाली थे। इसमें बताया गया है कि CBI में कुल स्वीकृत पद 7,273 हैं, लेकिन वास्तविक संख्या 5740 है।

यानी 1533 पद अपनी स्वीकृत संख्या से कम हैं। इस रिपोर्ट में जल्द समस्या का समाधान निकालने की बात पर भी जोर दिया गया है।

गौरतलब है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग CBI के साथ मासिक समीक्षा बैठकें करता है। इसमें सभी लंबित मामलों को 90 दिनों में निपटारा करने की सलाह दी जाती है।

कुछ विशेष मामलों को लेकर अलग से भी बैठकें की जाती हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central vigilance commission) हर साल इन मामलों पर अपनी रिपोर्ट तैयार करता है।

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