लातेहार में 5 लाख के इनामी नक्सली दशरथ उरांव ने किया आत्मसमर्पण

उसने अन्य नक्सलियों से भी अपील की कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ लें और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करें

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लातेहार: नक्सली संगठन (Naxalite Organization) TSPC के सब जोनल कमांडर दशरथ उरांव उर्फ रोशन ने सोमवार को लातेहार पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

रोशन 5 लाख रुपये का इनामी नक्सली है। लातेहार पुलिस (Latehar Police) अधीक्षक कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में IG राजकुमार लकड़ा और लातेहार SP अंजनी अंजन ने आत्मसमर्पण (Surrender) करने वाले नक्सली को सम्मानित किया।

माओवादी संगठन से जुड़ा

इस संबंध में जानकारी देते हुए IG राजकुमार लकड़ा ने बताया कि रोशन पूर्व में माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था, परंतु बाद में इसने TSPC का दामन थाम लिया।

यह मुख्य रूप से चतरा जिले के टंडवा थाना (Tandwa Police Station) क्षेत्र का रहने वाला है।

इस पर विभिन्न थाना क्षेत्रों में लगभग 60 से अधिक मामले दर्ज हैं। आईजी ने बताया कि इसका एक साथी ने वर्ष 2021 में सरकार के Surrender नीति का लाभ उठाते हुए सरेंडर किया था।

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उसी से प्रभावित होकर इसने भी आत्मसमर्पण करने की योजना बनाई थी। इसके बाद लातेहार एसपी समेत अन्य पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन के बाद इसने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

लातेहार में 5 लाख के इनामी नक्सली दशरथ उरांव ने किया आत्मसमर्पण Naxalite Dashrath Oraon, carrying a reward of 5 lakhs, surrendered in Latehar

हर संभव मदद करने को तैयार

SP ने कहा कि झारखंड सरकार (Government of Jharkhand) की आत्मसमर्पण नीति नक्सलियों के लिए काफी फायदेमंद है।

उन्होंने कहा कि रोशन ने आत्मसमर्पण कर काफी अच्छा काम किया है। अब यह समाज के मुख्यधारा में जुड़ कर अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी सकता है।

SP ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुलिस हर संभव मदद करने को तैयार है।

लातेहार में 5 लाख के इनामी नक्सली दशरथ उरांव ने किया आत्मसमर्पण Naxalite Dashrath Oraon, carrying a reward of 5 lakhs, surrendered in Latehar

नक्सलवाद और हिंसा इंसाफ नहीं दिला सकती

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली रोशन ने कहा कि 19 वर्षों तक नक्सल गतिविधियों में वह सक्रिय रहा है।

नक्सलवाद (Racism) और हिंसा कभी भी किसी को इंसाफ नहीं दिला सकती। 19 साल तक नक्सलवाद से जुड़े रहने के बाद उसे एहसास हो गया है कि यह रास्ता कभी भी सही नहीं है।

उसने अन्य नक्सलियों से भी अपील की कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ लें और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करें।

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